दीघा/कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद सुवेंदु अधिकारी पहली बार राज्य के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल दीघा पहुंचे हैं। मुख्यमंत्री रविवार शाम करीब 5:40 बजे दीघा-शंखपुर विकास बोर्ड (DSDA) के कार्यालय पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके तुरंत बाद उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की।इस बैठक में दीघा और आसपास के इलाकों के विकास के साथ-साथ राज्य की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना 'गहरे समुद्री बंदरगाह' (Deep Sea Port) को लेकर बड़ा ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है।
ताजपुर में नहीं है जमीन, दादनपात्रबाड़ बना नया विकल्प
पिछली राज्य सरकार के समय से ही यह चर्चा थी कि पूर्व मेदिनीपुर के ताजपुर में एक गहरा समुद्री बंदरगाह बनाया जाएगा, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होगा। हालांकि, जमीन की अनुपलब्धता के कारण यह परियोजना बरसों से अधर में लटकी हुई थी।
राज्य में नई सरकार के आने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस अटके हुए प्रोजेक्ट को रफ्तार देने की कवायद शुरू कर दी है। सुवेंदु अधिकारी ने साफ किया है कि जमीन की कमी के कारण ताजपुर में बंदरगाह बनाना संभव नहीं है। इसके विकल्प के रूप में ताजपुर से महज 10 किलोमीटर दूर दादनपात्रबाड़ (Mandarmani के पास) को चुना गया है।
मुख्यमंत्री ने इस संबंध में उद्योगपति गौतम अडानी के बेटे और अडानी पोर्ट्स के सीईओ करन अडानी के साथ पहले ही एक उच्च स्तरीय बैठक की है।
1,700 एकड़ जमीन का प्रस्ताव: मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बताया, "तजाणपुर में सरकार के पास जमीन नहीं है, इसलिए वहां डीप सी पोर्ट नहीं बन सकता। इसके बदले दादनपात्रबाड़ में एक पुराना नमक का कारखाना था, जहां सरकार के पास 1,700 एकड़ जमीन उपलब्ध है। हमने करन अडानी को इस जगह का प्रस्ताव दिया है।" माना जा रहा है कि आज की बैठक में इसी जमीन को पोर्ट के लिए सौंपने की प्रक्रियाओं पर चर्चा हुई है।
बैठक में दिग्गजों की मौजूदगी
रविवार को हुई इस प्रशासनिक बैठक में मुख्यमंत्री के साथ कांथी (Contai) के सांसद सौमेंदु अधिकारी, राज्य के सिंचाई मंत्री अरूप कुमार दास, रामनगर के विधायक डॉ. चंद्रशेखर मंडल, पूर्व मेदिनीपुर के जिला मजिस्ट्रेट (DM) निरंजन कुमार और जिला पुलिस अधीक्षक (SP) अंशुमान साहा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
दीघा जगन्नाथ धाम के नाम बदलने के बाद पहली बैठक
हाल ही में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दीघा के निर्माणाधीन जगन्नाथ मंदिर के नाम से 'धाम' शब्द हटाने की घोषणा की थी, जिसके बाद से दीघा की यह पहली बड़ी प्रशासनिक बैठक है। इस बैठक में दादनपात्रबाड़ बंदरगाह के साथ-साथ मंदारमणि और दीघा के पर्यटन उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
अडानी समूह के साथ इस प्रोजेक्ट पर अंतिम फैसला जल्द ही होने की संभावना है, जो बंगाल की आर्थिक स्थिति और रोजगार परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकता है।