कोलकाता/घाटाल: दशकों से राजनीतिक खींचतान और केंद्र-राज्य के बीच समन्वय की कमी के कारण अटका हुआ 'घाटाल मास्टर प्लान' अब हकीकत बनने जा रहा है। पश्चिम बंगाल को बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस प्रोजेक्ट को लेकर राज्य सरकार ने बड़ी घोषणा की है। बजट में घाटाल मास्टर प्लान को पूरी तरह धरातल पर उतारने के लिए 1200 करोड़ रुपये का फंड आवंटित किया गया है। दरअसल, केंद्र और राज्य में एक ही सरकार होने की वजह से बेहतर तालमेल और सुगठित समन्वय स्थापित हुआ है, जिससे इस योजना का तेजी से और सही रूप से कार्यान्वयन सुनिश्चित हो गया है।
ममता सरकार ने की थी शुरुआत, नई सरकार करेगी पूरा
साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले आरामबाग की एक रैली में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सांसद और अभिनेता दीपक अधिकारी (देव) की मौजूदगी में घोषणा की थी कि केंद्र की मदद के बिना राज्य सरकार अपने दम पर इसे पूरा करेगी। इसके बाद 2025 के बजट में इसके लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित कर प्राथमिक काम शुरू भी किया गया था। हालांकि, राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद इस प्रोजेक्ट के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे थे। लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने खुद स्पष्ट कर दिया है कि नई सरकार इस विकास कार्य को रुकने नहीं देगी और इसे पूरा करेगी।
कोलाघाट की बैठक में सीएम सुवेंदु और देव के बीच बनी सहमति
हाल ही में पूर्वी मेदिनीपुर के कोलाघाट में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में एक प्रशासनिक बैठक हुई थी, जिसमें घाटाल के सांसद देव भी शामिल हुए। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने विकास को राजनीति से ऊपर रखते हुए कहा, "घाटाल के सांसद देव ने मुझसे कहा कि घाटाल मास्टर प्लान को लागू करना उनका वादा था। मैंने उनसे कहा कि यह हमारा भी वादा था और हम इसे निश्चित रूप से पूरा करेंगे। चुनाव के समय राजनीति अपनी जगह है, लेकिन बाकी के पूरे साल हम सिर्फ विकास की बात करेंगे।"
वहीं सांसद देव ने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा, "2014 से ही घाटाल मास्टर प्लान को पूरा कराना मेरा मुख्य संकल्प रहा है। पिछली सरकार ने इसकी शुरुआत की थी और मुझे पूरा भरोसा है कि नई सरकार इसे पूरी तरह कंप्लीट करेगी।"
60 साल पुरानी योजना से दूर होगी बाढ़ की समस्या
घाटाल मास्टर प्लान मुख्य रूप से करीब छह दशक पुराना प्रोजेक्ट है। नदियों से घिरे घाटाल और उसके आस-पास के इलाकों को हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ से बचाने के लिए यह परियोजना बेहद प्रासंगिक है। इससे पहले फंड की कमी, जमीन अधिग्रहण में आ रही अड़चनों और प्रशासनिक मंजूरियां न मिलने के कारण पंप हाउस का निर्माण और शिलाबती सहित विभिन्न नहरों-नदियों से गाद (पॉली) निकालने का काम बेहद धीमा या बंद हो गया था, जिससे स्थानीय लोगों में अनिश्चितता का माहौल था। अब बजट में 1200 करोड़ रुपये की इस भारी आवंटन की घोषणा के बाद घाटाल के निवासियों ने राहत की सांस ली है।