कोलकाता: महानगर स्थित आइ-पैक कार्यालय में ईडी की छापेमारी से जुड़े मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एवी अंजारिया की खंडपीठ ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपने के संकेत दिए। अदालत की टिप्पणी के बाद इस मामले में जांच की दिशा बदलने की संभावना बढ़ गई है। ईडी ने आरोप लगाया है कि छापेमारी के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने जांच में बाधा डाली थी। वहीं, ममता बनर्जी और आइ-पैक की ओर से ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 2 सितंबर को होगी।
तत्कालीन मुख्यमंत्री पर जांच में बाधा डालने का आरोप
ईडी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एजेंसी का कहना है कि महानगर स्थित आइ-पैक कार्यालय में छापेमारी के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया था। आरोप है कि छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी कुछ अहम दस्तावेज अपने साथ लेकर चली गयी थीं। ईडी ने इसी आधार पर उनके खिलाफ जांच शुरू करने की मांग की है। एजेंसी का कहना है कि कथित तौर पर जांच में बाधा डालने की घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है। इसी मांग को लेकर ईडी ने शीर्ष अदालत का रुख किया है। मंगलवार की सुनवाई में इसी याचिका के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। मामले में आगे की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट के रुख को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्य पुलिस से जांच कराने पर उठे सवाल
ममता बनर्जी और आइ-पैक की ओर से ईडी की छापेमारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा गया। सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि अब सरकार बदल चुकी है, इसलिए मामले की जांच राज्य पुलिस द्वारा कराई जा सकती है। उनका तर्क था कि मौजूदा परिस्थितियों में राज्य पुलिस जांच करने में सक्षम है। इस पर न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने परिस्थितियों में हुए बदलाव का उल्लेख किया। उन्होंने संकेत दिया कि बाद में हुए राजनीतिक और प्रशासनिक बदलावों को देखते हुए मामले की स्थिति अलग हो चुकी है। अदालत की टिप्पणी के बाद राज्य पुलिस के जरिए जांच कराए जाने की संभावना कमजोर होती दिखाई दी। इसके बजाय मामले को किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी को सौंपने पर जोर बढ़ गया। इसी क्रम में अदालत ने सीबीआई जांच की मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया।
सीबीआई को जांच सौंपने के संकेत
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट संकेत दिया कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि अदालत याचिकाकर्ता की सीबीआई जांच की मांग को मंजूरी देने की अनुमति दे सकती है। इस टिप्पणी के बाद मामले में सीबीआई जांच लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि, अंतिम आदेश अगली सुनवाई में सामने आने की संभावना है। सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अपनी दलील रखने की इच्छा जताई। उन्होंने आग्रह किया कि इस मामले से जुड़े बड़े कानूनी मुद्दे पर भी फैसला किया जाना चाहिए। इससे संकेत मिला कि केंद्र की ओर से मामले के व्यापक कानूनी पहलुओं पर भी अदालत का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है। अब 2 सितंबर की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम रुख महत्वपूर्ण होगा।
क्या मौजूदा मुख्यमंत्री की भी जांच हो सकती है?
सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठाया गया कि यदि किसी मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान कथित अपराध हुआ हो, तो क्या जांच एजेंसी मौजूदा मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच कर सकती है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एवी राजू ने अदालत के सामने इसी कानूनी सवाल को उठाया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अदालत को स्पष्ट निर्णय करना चाहिए। उनका तर्क था कि पद पर रहते हुए किसी व्यक्ति के खिलाफ जांच की कानूनी स्थिति को स्पष्ट किया जाना जरूरी है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी की ओर से पेश वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि अब तक की सुनवाई मुख्य रूप से ईडी की रिट याचिका की स्वीकार्यता तक सीमित रही है। उन्होंने कहा कि मामले के गुण-दोष पर अभी विस्तृत बहस नहीं हुई है। इस वजह से इस स्तर पर आरोपों की सत्यता पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। अदालत अब आगे की सुनवाई में इन सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।
ईडी की कार्रवाई को लेकर आइ-पैक का भी पक्ष
आइ-पैक और ममता बनर्जी की ओर से ईडी की छापेमारी को लेकर पहले ही सवाल उठाए जा चुके हैं। उनकी ओर से अदालत में ईडी की कार्रवाई और उसके तरीके को चुनौती दी गयी है। दूसरी ओर, ईडी का कहना है कि छापेमारी के दौरान जांच में कथित रूप से बाधा पहुंचायी गयी। इसी विवाद के कारण मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। अब अदालत के सामने यह तय करना है कि मामले की जांच किस एजेंसी से करायी जाए। सीबीआई को जांच सौंपे जाने की स्थिति में पूरे घटनाक्रम की नए सिरे से जांच हो सकती है। इसमें छापेमारी के दौरान हुई घटनाओं और कथित तौर पर दस्तावेज ले जाने के आरोपों की भी पड़ताल संभव है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल दोनों पक्षों की दलीलों के बीच मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
2 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 2 सितंबर की तारीख तय की है। मंगलवार की सुनवाई में सीबीआई जांच को लेकर अदालत की टिप्पणी के बाद इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अगली सुनवाई में अदालत मामले की जांच को लेकर औपचारिक आदेश दे सकती है। साथ ही, मौजूदा मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच से जुड़े कानूनी सवाल पर भी चर्चा होने की संभावना है। ममता बनर्जी की ओर से मामले की स्वीकार्यता और जांच के दायरे को लेकर दलीलें रखी जा सकती हैं। वहीं, ईडी और केंद्र सरकार की ओर से भी अपनी मांगों पर जोर दिया जा सकता है। ऐसे में 2 सितंबर की सुनवाई राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। तब यह स्पष्ट हो सकता है कि मामले की जांच किस एजेंसी के हाथों में जाएगी और आगे की कार्रवाई किस दिशा में बढ़ेगी।