कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर चल रहे विवाद के बीच कलकत्ता उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ ने तृणमूल कांग्रेस नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि फिलहाल विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय अपने पद पर बने रहेंगे। अदालत ने यह भी कहा कि तथाकथित ‘बागी’ तृणमूल गुट द्वारा लिए गए फैसले में इस समय कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक अलग गुट ने संगठनात्मक और विधायी स्तर पर कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए। इन्हीं निर्णयों के तहत विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में ऋतब्रत बंद्योपाध्याय की भूमिका को मान्यता दी गई। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार के मंत्री रह चुके शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। याचिका में दावा किया गया था कि संबंधित गुट को ऐसे निर्णय लेने का अधिकार नहीं था और विपक्ष के नेता के पद को लेकर लिए गए फैसले की वैधता पर सवाल उठाया गया था। इसी कारण मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय में शुरू हुई।
अदालत ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने अंतरिम आदेश में शोभनदेव चट्टोपाध्याय की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने फिलहाल किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए मौजूदा स्थिति को बरकरार रखने का निर्देश दिया। इसका सीधा अर्थ यह है कि ऋतब्रत बंद्योपाध्याय विपक्ष के नेता के रूप में अपना दायित्व निभाते रहेंगे। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले का अंतिम निपटारा अभी नहीं हुआ है और याचिका से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं पर आगे भी विचार किया जाएगा।
जुलाई में होगी अगली सुनवाई
उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई माह में निर्धारित की है। उस दौरान दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद ही अदालत इस विवाद पर कोई अंतिम निर्णय दे सकती है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा
अदालत के इस अंतरिम आदेश के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के पद पर बने रहने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन अंतिम फैसला आने तक यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहेगा। जुलाई में होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि उसी के बाद इस विवाद की दिशा और स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।