कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राजनीतिक और औद्योगिक गलियारों में दशकों से यह भ्रम रहा है कि राज्य में असली ताकत सरकार के पास है या सत्तारूढ़ दल के पास। उद्योगपतियों और निवेशकों के मन से इसी असमंजस को दूर करने के लिए अब पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य खुद मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने साफ और कड़ा संदेश दिया है कि बदलाव के बंगाल में उद्योगपतियों को निवेश के लिए अब सत्तारूढ़ दल के चक्कर काटने की कोई जरूरत नहीं है, वे सीधे राज्य सरकार से बात करें।
बुधवार को कोलकाता में एक व्यापारिक संगठन के कार्यक्रम में शामिल हुए शमीक भट्टाचार्य ने इशारों-इशारों में स्पष्ट किया कि यदि राज्य का वास्तविक विकास करना है, तो सबसे पहले सरकार को स्वतंत्र रूप से काम करने देना होगा। सरकार पर किसी भी राजनीतिक दल (पार्टी) का नियंत्रण नहीं होना चाहिए।
"उद्योगपतियों का मुझसे संपर्क करना खतरनाक चलन"
भाजपा के सत्ता में आने के बाद के पिछले डेढ़ महीने के अपने अनुभवों को साझा करते हुए शमीक भट्टाचार्य ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने कहा, "पिछले डेढ़ महीने में देश के कई बड़े उद्योगपतियों ने सरकार के पास जाने से पहले मुझसे (पार्टी अध्यक्ष के नाते) संपर्क किया है। मेरी नजर में यह एक बेहद खतरनाक चलन है।"
दिलचस्प बात यह रही कि जिस व्यापारिक कार्यक्रम में भाजपा अध्यक्ष यह बातें कह रहे थे, वहां राज्य सरकार के किसी भी प्रतिनिधि को आमंत्रित नहीं किया गया था। इस पर चुटकी लेते हुए शमीक ने कहा, "यहाँ राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं है, सिर्फ मुझे आमंत्रित किया गया है। यह भी एक खतरनाक सोच है। हम बंगाल को इसी सोच से मुक्त करना चाहते हैं। मैं पार्टी का प्रतिनिधि हूँ, सरकार का नहीं।"
50 साल के 'पार्टी तंत्र' ने बिगाड़ा माहौल
शमीक भट्टाचार्य ने समझाया कि आखिर क्यों उद्योगपति दूसरे राज्यों की तरह बंगाल में सीधे सरकार से बात नहीं करते। उन्होंने इसके लिए बंगाल के राजनीतिक इतिहास को जिम्मेदार ठहराया।
माइंडसेट पर चोट: भाजपा नेतृत्व का मानना है कि पिछले 34 साल के वामपंथी शासन और उसके बाद के 15 साल के तृणमूल (TMC) शासन ने कॉरपोरेट जगत का माइंडसेट बिगाड़ दिया है। उद्योगपतियों को लगता है कि पश्चिम बंगाल में जो कुछ भी होता है, वह पार्टी करती है, सरकार स्वतंत्र नहीं है। चाहे रेल किराया वृद्धि का विरोध हो या सिंगूर में उद्योग का ठप होना—बंगाल ने हमेशा 'पार्टी तंत्र' देखा है, जहां सरकार की कोई अहमियत नहीं रही। इसी का खामियाजा आज की पीढ़ी भुगत रही है।
अलीमुद्दीन स्ट्रीट और टीएमसी संस्कृति का अंत
शमीक के करीबी एक भाजपा नेता ने कहा, "वामपंथी शासन के दौरान सरकार अलीमुद्दीन स्ट्रीट (माकपा मुख्यालय) से चलती थी। बाद में टीएमसी के राज में दल और सरकार के बीच का अंतर ही खत्म हो गया। लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के बाद से शमीक भट्टाचार्य लगातार निवेशकों को यह भरोसा दिला रहे हैं कि वे बिना किसी डर के बंगाल में व्यापार कर सकते हैं।"
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दृढ़ विश्वास जताते हुए कहा कि पार्टी अपने रास्ते चलेगी और सरकार अपने रास्ते। दोनों के बीच समन्वय (तालमेल) जरूर रहेगा, लेकिन सरकार के कामकाज में पार्टी का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। उन्होंने दावा किया, "आने वाले एक साल के भीतर दुनिया देख लेगी कि पश्चिम बंगाल में एक वास्तविक उद्योग-अनुकूल (इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली) सरकार काम कर रही है।"