पश्चिम बंगाल : में कानून व्यवस्था को मजबूत करने, महिला सुरक्षा को पुख्ता करने और बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने राज्यभर में Durga Squad ‘साइबर हेल्पडेस्क’ (Cyber Help Desk) और ‘महिला हेल्पडेस्क’ का आधिकारिक उद्घाटन किया है।
उद्घाटन मंच से मुख्यमंत्री ने राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदलने का ब्लूप्रिंट पेश किया। उन्होंने राज्य पुलिस के महानिदेशक (DGP) सिद्धीनाथ गुप्ता के नेतृत्व में बेहद कम समय में इस आधुनिक बुनियादी ढांचे को तैयार करने के लिए पुलिस प्रशासन की सराहना की। सीएम ने साफ कहा कि उनका लक्ष्य पुलिस व्यवस्था में सुधार कर आपातकालीन सेवाओं (Emergency Services) के रिस्पॉन्स टाइम को 3 घंटे से घटाकर मात्र 5 मिनट पर लाना है।
साइबर अपराध एक 'महामारी', बनेगी विशेष विंग
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य के विभिन्न हिस्सों से जुड़े पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि साइबर अपराध इस समय एक सामाजिक महामारी का रूप ले चुका है। सरकारी योजनाओं के फॉर्म भरने के बहाने गरीब और आम लोगों के बैंक खातों की जानकारी चुराकर जालसाज कुछ ही सेकेंड में उनकी जिंदगी भर की कमाई लूट रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा:"मैं जब हर हफ्ते 'जनता दरबार' लगाता हूँ, तो देखता हूँ कि कई बुजुर्ग लाठी के सहारे कांपते हुए मेरे पास आते हैं। वे रोते हुए बताते हैं कि उन्होंने नौकरी के बाद प्रविडेंट फंड (PF) या ग्रेच्युटी का जो पैसा अपनी पोती की डॉक्टरी की पढ़ाई या बेटे के सिर पर छत के लिए जमा किया था, वह एक झटके में गायब हो गया। सामान्य ज्ञान से इस जटिल अपराध का मुकाबला असंभव है, इसके लिए आधुनिक प्रशिक्षण (Modern Training) की जरूरत है।"
प्रशासन के नए कदम:
1. विशेषज्ञ अधिकारी की नियुक्ति: राज्य स्तर पर साइबर अपराधों की विशेष निगरानी के लिए एक समर्पित वरिष्ठ अधिकारी (ADG या IG रैंक) की नियुक्ति की जाएगी, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के साथ समन्वय स्थापित कर पूरे राज्य के साइबर थानों की देखरेख करेंगे।
2. आधुनिक बुनियादी ढांचा: साइबर विंग को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार सभी प्रकार के आधुनिक उपकरण और रसद सहायता (Logistic Support) प्रदान करेगी।
आरजी कर की कड़वी सीख: महिला सुरक्षा पर 'जीरो टॉलरेंस'
मुख्यमंत्री ने संतोष जताया कि डीजीपी और गृह सचिव की तत्परता से सितंबर की तय समय सीमा से काफी पहले ही 'महिला हेल्पडेस्क' की शुरुआत कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई सरकार की प्राथमिकताओं में महिला और बेटियों की सुरक्षा पहले नंबर पर है। पॉक्सो (POCSO) अधिनियम, निर्भया कांड से लेकर राज्य के हालिया 'आरजी कर' (RG Kar) कांड तक के जो कड़वे अनुभव रहे हैं, उनसे सीख लेते हुए सरकार महिलाओं को न्याय और सुरक्षा देने के लिए 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति पर काम करेगी।
पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले महिला और बाल अपराधों से जुड़े जो आंकड़े केंद्रीय गृह मंत्रालय मांगता था, उन्हें छिपाया जाता था या भेजा नहीं जाता था। उन्होंने पुलिस को सख्त निर्देश दिया, "राज्य में क्या बीमारी (अपराध) फैल रही है, इसे छिपाने से बीमारी और बढ़ेगी। कोई भी शिकायत आए तो उसे छिपाने की कोशिश न करें, सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करें।"
दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री जैसी बनेगी बंगाल पुलिस
थानों में बुनियादी ढांचे और कर्मियों (Manpower) की कमी को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया कि जल्द ही इन कमियों को दूर कर पश्चिम बंगाल पुलिस को दिल्ली पुलिस या केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (Central Paramilitary Forces) के समान आधुनिक और अनुशासित बनाया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि पुलिस के कामकाज में कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होगा।
हाल ही में पार्क सर्कस और आसनसोल में पुलिस पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि निचले स्तर के जवानों का मनोबल (Morale) बढ़ाने के लिए वे खुद पीड़ित पुलिसकर्मियों के साथ खड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि विधानसभा में हाल ही में पारित हुआ कड़ा 'गुंडा दमन बिल' आने वाले दिनों में पुलिस के लिए सुरक्षित कामकाजी माहौल तैयार करेगा।
तारातला हादसा और '112' सेवा को 5 मिनट का चैलेंज
हाल ही में तारातला में बहुमंजिला इमारत गिरने के हादसे में कोलकाता पुलिस, दमकल विभाग, नगर निगम और बाद में एनडीआरएफ (NDRF) व सेना (Army) की संयुक्त भूमिका की मुख्यमंत्री ने जमकर तारीफ की। उन्होंने याद दिलाया कि अतीत में पोस्ता, माझेरहाट या गार्डेनरीच जैसी आपदाओं में मलबे से किसी को जीवित नहीं बचाया जा सका था, लेकिन इस बार त्वरित कार्रवाई टीम (Quick Response Team) की मुस्तैदी के कारण 20 लोगों को सुरक्षित मलबे से बाहर निकाला गया।
इस त्वरित कार्यक्षमता को राज्य के हर कोने में पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री ने आगामी दुर्गा पूजा से पहले राज्यभर में पूर्ण '112' आपातकालीन सेवा शुरू करने का निर्देश दिया है:
रिस्पॉन्स टाइम का लक्ष्य: वर्तमान में गुजरात, उत्तर प्रदेश या महाराष्ट्र में फोन करने के 6 मिनट के भीतर पुलिस पहुंच जाती है, जबकि पश्चिम बंगाल में यह औसत समय लगभग 3 घंटे का है। सीएम सुवेंदु अधिकारी ने अगले एक साल के भीतर इस समय को घटाकर 5 मिनट करने का लक्ष्य रखा है।
16,000 नए जवानों की तैनाती: आगामी सितंबर महीने में ही ट्रेनिंग पूरी कर चुके राज्य पुलिस के 12,000 और कोलकाता पुलिस के 4,000— यानी कुल 16,000 नए जवानों को सेवा में उतारा जा रहा है। अगले बजट में '112' सेवा के लिए वाहनों की संख्या और बढ़ाई जाएगी, ताकि राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के प्रशिक्षण से तैयार यह पुलिस बल राज्य की सुरक्षा की सबसे मजबूत दीवार बन सके।