पश्चिम मेदिनीपुर: पश्चिम बंगाल में लगातार हो रही बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को पश्चिम मेदिनीपुर के बाढ़ प्रभावित सबंग और आसपास के क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। बीडीओ कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने देगी।
50 हजार लोग प्रभावित, 2 लोगों की मौत
समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि केलघाई और आसपास की नदियों के उफान के कारण क्षेत्र की 5 से 6 ग्राम पंचायतों के करीब 50,000 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग 4,000 से 5,000 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं, जबकि बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में 2 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य, सिंचाई, पीएचई, बिजली विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की।
उन्होंने निर्देश दिया कि:
- राहत सामग्री वितरण में कोई बाधा न आए।
- सभी प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
- चिकित्सा सेवाएं लगातार जारी रहें।
- बिजली आपूर्ति जल्द से जल्द सामान्य की जाए।
- राहत शिविरों में रहने वालों की सभी आवश्यक जरूरतों का ध्यान रखा जाए।
कई ग्राम पंचायतें सबसे ज्यादा प्रभावित
मुख्यमंत्री के अनुसार, बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं:
- सबंग ब्लॉक की 5 ग्राम पंचायतें
- भगवानपुर ब्लॉक की 4 ग्राम पंचायतें
- मयना ब्लॉक की 1 ग्राम पंचायत
- पोटाशपुर-1 की गोकुलनगर ग्राम पंचायत
इन इलाकों में जलभराव के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों को मिलेगा मुआवजा
मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग और जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि जलमग्न फसलों का तत्काल सर्वेक्षण कराया जाए। उन्होंने कहा कि नुकसान का आकलन कर फसल बीमा और मुआवजा प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, ताकि प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।
आरामबाग के लिए रवाना हुए मुख्यमंत्री
सबंग में समीक्षा बैठक और बाढ़ प्रभावित इलाकों के निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी हेलीकॉप्टर से हुगली जिले के आरामबाग के लिए रवाना हो गए, जहां वे बाढ़ की स्थिति को लेकर एक और प्रशासनिक समीक्षा बैठक करेंगे।
पुनर्वास पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलस्तर कम होते ही क्षतिग्रस्त सड़कों, सार्वजनिक ढांचों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।