कोलकाता: पूर्व राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक स्वपन दासगुप्ता ने पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था, रोजगार और औद्योगिक विकास को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था केवल कमजोर नहीं, बल्कि बुनियादी अव्यवस्था और पतन का शिकार हो चुकी है। साथ ही उन्होंने राज्य में कुशल मानव संसाधन की भारी कमी का भी उल्लेख किया।
कोलकाता विश्वविद्यालय की घटती प्रतिष्ठा पर चिंता
स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि एक समय एशिया के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में गिने जाने वाला कोलकाता विश्वविद्यालय आज अपनी प्रतिष्ठा और महत्व खो चुका है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।
शिक्षा में निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी
उन्होंने कहा कि शिक्षा के विकास की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं हो सकती। निजी क्षेत्र को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उनके अनुसार सरकारी, निजी और विदेशी—तीनों प्रकार के विश्वविद्यालयों को समान महत्व देकर शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाया जाना चाहिए।
तकनीक आधारित शिक्षा और रोजगार पर जोर
स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि बदलते दौर के साथ पाठ्यक्रम को आधुनिक तकनीक के अनुरूप बनाना और शिक्षकों की दक्षता बढ़ाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं बनाए गए तो राज्य से प्रतिभाओं का पलायन लगातार बढ़ता रहेगा।
ओडिशा और असम से पीछे रह गया बंगाल
उन्होंने दावा किया कि विकास की दौड़ में ओडिशा और असम जैसे राज्य आगे निकल चुके हैं, जबकि पश्चिम बंगाल पीछे रह गया है। उन्होंने उद्योगपतियों और निवेशकों से राज्य में लौटकर निवेश करने की अपील की।
सामूहिक प्रयास से विकास का आह्वान
स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि सरकार निवेश और विकास के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर सकती है, लेकिन राज्य के समग्र विकास की जिम्मेदारी समाज, उद्योग और शिक्षा जगत सहित सभी की है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य शिक्षा, उद्योग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल को फिर से देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना होना चाहिए।