कोलकाता - पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार ने अपना पहला पूर्ण बजट पेश करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने विधानसभा में बजट प्रस्तुत किया, जिसमें महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास, शिक्षा और सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता दी गई है। बजट के कई प्रावधानों के बीच मदरसा शिक्षा के लिए आवंटित राशि में कटौती सबसे अधिक चर्चा का विषय बनी हुई है।
मदरसा शिक्षा का बजट हुआ आधा
सरकार ने इस बार मदरसा शिक्षा के लिए आवंटित बजट में बड़ी कटौती करते हुए इसे लगभग आधा कर दिया है। हालांकि सरकार की ओर से इस फैसले के पीछे संसाधनों के पुनर्वितरण और शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधारों की दलील दी जा रही है, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। विपक्षी दल इस निर्णय को अल्पसंख्यक शिक्षा से जोड़कर सरकार को घेर सकते हैं।
महिला और बाल विकास को सबसे बड़ा आवंटन
बजट में सबसे अधिक राशि "महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण" विभाग के लिए निर्धारित की गई है। इस विभाग को 52,308.50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सरकार का कहना है कि महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाओं को और मजबूत किया जाएगा।
ग्रामीण विकास पर भी विशेष जोर
महिला एवं बाल विकास विभाग के बाद सबसे बड़ा आवंटन "पंचायत एवं ग्रामीण विकास" विभाग को मिला है। इस क्षेत्र के लिए 51,836.55 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और गांवों में विकास कार्यों को गति देना है।
शिक्षा क्षेत्र को भी बड़ी राशि
राज्य सरकार ने स्कूली शिक्षा को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल रखा है। स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 44,948.21 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। सरकार का दावा है कि इस राशि का उपयोग स्कूलों के बुनियादी ढांचे, शिक्षकों की उपलब्धता और छात्रों की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने में किया जाएगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया पर रहेंगी नजरें
मदरसा शिक्षा के बजट में कटौती और अन्य क्षेत्रों में बढ़े हुए आवंटन को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस फैसले को किस तरह उचित ठहराती है और विपक्ष इस मुद्दे को कितना बड़ा राजनीतिक विषय बनाता है।