कोलकाता: कालीघाट से लेकर तारापीठ तक और मदन मोहन मंदिर से लेकर जल्पेश तक—पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक और पौराणिक मंदिरों की एक समृद्ध श्रृंखला है। हालांकि, मुट्ठी भर प्रसिद्ध मंदिरों को छोड़कर राज्य के बाकी कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों के प्रचार-प्रसार और संरक्षण में लंबे समय से उदासीनता देखी जा रही थी। अब इस तस्वीर को बदलने के लिए पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने अपने पहले बजट में एक दूरगामी और बड़ी घोषणा की है। राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने बंगाल के ऐतिहासिक मंदिरों के संरक्षण, जीर्णोद्धार और धार्मिक पर्यटन के विस्तार के लिए विशेष कार्ययोजना का खाका पेश किया है।
ऐतिहासिक स्थलों के लिए बनेगा 'हेरिटेज कमीशन'
वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने बजट भाषण में घोषणा की कि राज्य के धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण स्थलों के सर्वांगीण विकास, योजना और उनके समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए एक उच्च स्तरीय 'हेरिटेज कमीशन' (Heritage Commission) का गठन किया जाएगा। यह कमीशन विशेष रूप से कालीघाट, तारापीठ, मदन मोहन मंदिर, कंकालीतला, जल्पेश, कल्याणेश्वरी और किरीटेश्वरी जैसे प्रसिद्ध व प्राचीन मंदिरों के संरक्षण और वहां नागरिक सुविधाओं के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा।
देशभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा 'बेंगल शक्तिपीठ सर्किट'
पश्चिम बंगाल को देश के नक्शे पर एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में मजबूती से स्थापित करने के लिए सरकार ने 'बेंगल शक्तिपीठ सर्किट' (Bengal Shaktipeeth Circuit) बनाने का एलान किया है। इस योजना के तहत, एक प्रमुख जिला शहर को केंद्र (नोडल पॉइंट) बनाकर उसके आस-पास के कई महत्वपूर्ण मंदिरों को आपस में जोड़ा जाएगा और एक सुव्यवस्थित पर्यटन कार्यक्रम विकसित किया जाएगा। वित्त मंत्री के अनुसार, भ्रामरी देवी, नंदीकेश्वरी, फुल्लरा और कंकालीतला जैसे पवित्र शक्तिपीठों को इस सर्किट का हिस्सा बनाया जाएगा।
चैतन्य महाप्रभु सर्किट के लिए 1000 करोड़ का भारी-भरकम फंड
वैष्णव संप्रदाय के अनुयायियों और आध्यात्मिक पर्यटकों की सुविधा के लिए सरकार 'चैतन्य महाप्रभु तीर्थयात्रा सर्किट' भी विकसित करने जा रही है। इसमें भी एक मुख्य जिला शहर को केंद्र में रखकर महाप्रभु चैतन्य देव से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन मार्ग से जोड़ा जाएगा। राज्य सरकार ने इस पूरी योजना और धार्मिक पर्यटन को सुगम व आकर्षक बनाने के लिए अगले तीन वर्षों में 1000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल बंगाल की सांस्कृतिक विरासत सहेजी जाएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।