कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के आम नागरिकों, जमीन मालिकों और विशेष रूप से किसानों के हित में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। सरकार ने जमीन के खतियान (Record-of-Rights) और प्लॉट की जानकारी (Plot Information) प्राप्त करने के लिए पहले ली जाने वाली आवेदन फीस (Enquiry Charges) को आधिकारिक तौर पर पूरी तरह से माफ कर दिया है।
सरकार की ओर से प्रतिबद्धता जताते हुए कहा गया है कि नागरिक सेवाएं पूरी तरह से पारदर्शी, परेशानी मुक्त और आसानी से सुलभ होनी चाहिए। इस नए कदम के बाद अब राज्य का कोई भी नागरिक महज 'एक क्लिक' के जरिए अपनी जमीन से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड हासिल कर सकेगा।
अधिसूचना जारी: अब नहीं लगेगा कोई चार्ज
पश्चिम बंगाल सरकार के भूमि एवं भूमि सुधार तथा शरणार्थी राहत एवं पुनर्वास विभाग (नवान्न) द्वारा इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना (नंबर: 200-Budget(General)/LL/O/1B-16/2026) जारी की गई है। राज्यपाल के आदेशानुसार प्रधान सचिव सुरेन्द्र गुप्ता (IAS) द्वारा हस्ताक्षरित इस अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि 'वेस्ट बंगाल लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1955' की धारा 57 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए 'बंगाल रिकॉर्ड्स मैनुअल, 1943' के नियमों (रूल 320H और रूल 320I) में संशोधन किया गया है।
नए नियमों के तहत मुख्य बदलाव:
पूरी तरह से निशुल्क: डिजिटल लैंड रिकॉर्ड डेटाबेस से ऑनलाइन खतियान या व्यक्तिगत 'रिकॉर्ड-ऑफ-राइट्स' प्राप्त करने के लिए अब कोई आवेदन शुल्क या प्रमाणीकरण शुल्क (Authentication Fee) नहीं देना होगा।
पेजों की संख्या का बंधन खत्म: खतियान में चाहे कितने भी पेज क्यों न हों, डिजिटली हस्ताक्षरित सॉफ्ट कॉपी डाउनलोड करने के लिए कोई पैसा नहीं लगेगा।
प्लॉट की जानकारी भी फ्री: किसी भी जमीन के प्लॉट की जानकारी (Plot Information) की सॉफ्ट कॉपी भी अब इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से बिना किसी फीस के मुफ्त में डाउनलोड की जा सकेगी।
सिर्फ डिजिटल कॉपियों पर लागू, हार्ड कॉपी के लिए लगेगा शुल्क
सरकार ने साफ किया है कि यह छूट केवल ऑनलाइन माध्यम से डाउनलोड की जाने वाली डिजिटली हस्ताक्षरित कॉपियों (सॉफ्ट कॉपी) पर ही लागू होगी। यदि कोई नागरिक कार्यालय से प्रमाणित हार्ड कॉपी (Certified Hard Copies) प्राप्त करना चाहता है, तो उस पर मौजूदा नियमों के तहत देय शुल्क लागू रहेगा।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों के लिए सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाना, उन पर वित्तीय बोझ को कम करना और जमीन से जुड़ी जानकारियों की झंझट-मुक्त इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी को बढ़ावा देना है। पूर्ववर्ती व्यवस्था में इन डिजिटल दस्तावेजों को निकालने के लिए शुल्क देना पड़ता था, जिससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब किसानों को काफी परेशानी होती थी। अब अपनी जमीन और अपने अधिकारों की जानकारी सीधे जनता के हाथों में मुफ्त उपलब्ध होगी। वित्त विभाग की सहमति के बाद यह निर्देश तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है।