कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए ट्रांसफर और पैकिंग भत्ते से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। वित्त विभाग ने पुरानी ट्रांसफर ग्रांट और पैकिंग एलाउंस व्यवस्था को समाप्त कर उसकी जगह कंपोजिट ट्रांसफर एंड पैकिंग ग्रांट लागू करने का फैसला किया है। वित्त विभाग की ऑडिट शाखा, नबन्ना की ओर से 27 अगस्त 2026 को इस संबंध में मेमोरेंडम संख्या 3205–F(P1) जारी किया गया। प्रस्ताव को राज्य मंत्रिमंडल ने 19 अगस्त 2026 की बैठक में मंजूरी दी थी।
ट्रांसफर पर अब ₹50 हजार तक की एकमुश्त राशि
नए नियमों के तहत जनहित में स्थानांतरण होने पर कर्मचारी को ₹50,000 या उसके मूल वेतन (Basic Pay) का 80 प्रतिशत, जो भी कम हो, कंपोजिट ट्रांसफर एंड पैकिंग ग्रांट के तौर पर दिया जाएगा। इस राशि को प्राप्त करने के लिए कर्मचारी को पैकिंग या सामान ढोने से संबंधित बिल और रसीदें जमा करने की जरूरत नहीं होगी। यानी यह सुविधा एकमुश्त राशि के रूप में मिलेगी।
30 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर पूरी ग्रांट
ग्रांट की राशि स्थानांतरण की दूरी और आवास बदलने की स्थिति पर निर्भर करेगी। 30 किलोमीटर या उससे अधिक: यदि नए स्टेशन की दूरी कम से कम 30 किलोमीटर है और कर्मचारी को अपना आवास भी बदलना पड़ता है, तो पूरी निर्धारित ग्रांट मिलेगी। 30 किलोमीटर से कम: यदि स्थानांतरण 30 किलोमीटर से कम दूरी पर है या उसी स्टेशन के भीतर हुआ है और आवास बदलना पड़ता है, तो निर्धारित ग्रांट का एक-तिहाई भुगतान किया जाएगा। खास बात यह है कि कर्मचारी परिवार को साथ लेकर न जाए और केवल अपना निजी सामान नए स्थान पर ले जाए, तब भी वह ग्रांट के लिए पात्र होगा। सामान की मात्रा को लेकर भी कोई न्यूनतम सीमा नहीं रखी गई है।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी मिलेगा लाभ
सरकार ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए भी इस योजना में प्रावधान किया है। 31 मई 2026 या उसके बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी, यदि अपनी अंतिम ड्यूटी स्टेशन से 30 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर नया निवास स्थापित करते हैं, तो उन्हें निर्धारित कंपोजिट ट्रांसफर एंड पैकिंग ग्रांट मिल सकती है। वहीं, अंतिम ड्यूटी स्टेशन पर या उससे 30 किलोमीटर के भीतर बसने पर एक-तिहाई ग्रांट का प्रावधान है।
किन कर्मचारियों पर लागू होंगे नए नियम?
नया नियम उन कर्मचारियों पर लागू होगा जिन्होंने जनहित में स्थानांतरण के बाद 1 जून 2026 या उसके बाद नए पद पर योगदान दिया है। सेवानिवृत्ति के मामलों में यह व्यवस्था 31 मई 2026 या उसके बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए लागू होगी। ग्रांट की गणना कर्मचारी के उस महीने के मूल वेतन के आधार पर की जाएगी, जिस महीने उसने नए पद पर योगदान किया है।
पुरानी व्यवस्था की जगह सरल प्रणाली
नई व्यवस्था का उद्देश्य ट्रांसफर के दौरान कर्मचारियों को सामान पैक करने और स्थानांतरित करने से जुड़े खर्च के लिए एक सरल भुगतान व्यवस्था उपलब्ध कराना है। रसीदों और वास्तविक खर्च का अलग-अलग हिसाब देने के बजाय निर्धारित नियमों के आधार पर एकमुश्त राशि दिए जाने से प्रक्रिया को भी आसान बनाने की कोशिश की गई है।
