कोलकाता : पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुलभ और मरीज-अनुकूल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। विभाग की ओर से जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक, अब राज्य के अस्पतालों को मरीजों की सहूलियत के लिए कई बड़े प्रशासनिक बदलाव करने होंगे। इस कदम से सरकारी अस्पतालों पर निर्भरता कम होने और गरीब मरीजों को निजी स्तर पर भी बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद है।
हर अस्पताल में तैनात होगा 'फैसिलिटी मैनेजर'
स्वास्थ्य विभाग की नई गाइडलाइंस के अनुसार, सरकारी नियमों और मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं को सही तरीके से लागू करने के लिए अब हर अस्पताल को अनिवार्य रूप से एक अलग 'फैसिलिटी मैनेजर' (Facility Manager) नियुक्त करना होगा। इस मैनेजर की जिम्मेदारी होगी कि वह अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नजर रखे और मरीजों को मिल रही सुविधाओं को सुनिश्चित करे।
आरक्षित बेडों का सुचारू बंटवारा और अलग स्टाफ
नए निर्देशों में साफ कहा गया है कि अस्पतालों के विभिन्न विभागों में आरक्षित बेडों (Reserved Beds) का संतुलन और सही बंटवारा सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, इन आरक्षित बेडों पर भर्ती होने वाले मरीजों की देखभाल के लिए अस्पताल प्रशासन को अलग से नर्सिंग स्टाफ और सहायक स्वास्थ्य कर्मी (Supportive Healthcare Staff) तैनात करने होंगे, ताकि सामान्य काम प्रभावित न हो।
शिकायतों के लिए टोल-फ्री कॉल बैक सिस्टम
मरीजों और उनके परिजनों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पारदर्शिता पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। अब अस्पतालों को एक टोल-फ्री कॉल बैक सिस्टम (Toll-Free Callback System) शुरू करना होगा। इसके जरिए मरीज या उनके परिवार वाले इलाज से जुड़ी किसी भी तरह की लापरवाही या असुविधा की शिकायत सीधे दर्ज करा सकेंगे।
तीन भाषाओं में चमकेगा डिस्प्ले बोर्ड
अस्पतालों में मिलने वाली मुफ्त सेवाओं और आरक्षित सीटों की जानकारी अब कोई छिपा नहीं सकेगा। गाइडलाइंस के मुताबिक, अस्पताल के ऐसे मुख्य स्थानों पर—जहाँ हर किसी की नजर आसानी से जा सके—एक बड़ा डिस्प्ले बोर्ड लगाना होगा। इस बोर्ड पर बांग्ला, हिंदी और अंग्रेजी, इन तीनों भाषाओं में मुफ्त सेवाओं और नियमों से जुड़ी पूरी जानकारी साफ-साफ लिखनी होगी।
सरकारी अस्पतालों से घटेगा बोझ
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग के साथ हुई हालिया बैठक में शामिल लगभग सभी अस्पतालों ने आरक्षित बेडों की संख्या बढ़ाने का भरोसा दिया है। स्वास्थ्य विभाग को पूरी उम्मीद है कि इन नए नियमों के जमीन पर उतरते ही सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का अत्यधिक दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। साथ ही, जो मरीज आर्थिक तंगी के कारण अब तक बेहतर और आधुनिक इलाज से वंचित रह जाते थे, उनके लिए भी अब स्वास्थ्य सेवाएँ बेहद आसान और सुलभ हो जाएंगी।