कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को एसएसकेएम अस्पताल में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की पहली उच्चस्तरीय बैठक में साफ कर दिया कि राज्य के किसी भी सरकारी अस्पताल में अब मरीजों को लौटाया नहीं जाएगा। सरकार ने “नो-रिफ्यूज़ल पॉलिसी” लागू करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। बैठक में राज्य के स्वास्थ्य अधिकारी, कोलकाता के आठ मेडिकल कॉलेज एवं टीचिंग इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधि, भाजपा विधायक एवं चिकित्सक इंद्रनील खां, शारद्वत मुखोपाध्याय, स्वास्थ्य सचिव नारायणस्वरूप निगम और कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बेड नहीं तो निजी अस्पतालों में होगा इलाज
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ सरकारी अस्पतालों में बेड बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। अगर किसी सरकारी अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं रहेगा तो मरीजों को सरकारी निगरानी में निजी अस्पतालों, निजी मेडिकल कॉलेजों और केंद्रीय सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया जाएगा। इसके लिए एक विशेष “पूल सिस्टम” तैयार किया जाएगा, ताकि किसी भी मरीज को इलाज से वंचित न होना पड़े। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि किसी भी परिस्थिति में मरीज को वापस नहीं भेजा जाएगा।
एम्बुलेंस सेवाओं में खत्म होगा ‘दलालराज’
बैठक में एम्बुलेंस सेवाओं को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने साफ कहा कि एम्बुलेंस किराए में मनमानी और दलालों की भूमिका को खत्म किया जाएगा। अब सभी निजी एम्बुलेंस को एक सरकारी ऐप आधारित नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। यह व्यवस्था ऐप-कैब सेवा की तरह काम करेगी, जहां तय दूरी के हिसाब से निश्चित किराया लिया जाएगा। इससे मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिलने की उम्मीद है।
अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत
बैठक में अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा हुई। तय किया गया है कि सभी डॉक्टर, कर्मचारी, अधिकारी और मेडिकल छात्रों को फोटोयुक्त पहचान पत्र गले में पहनना अनिवार्य होगा। सरकार ने निर्देश दिया है कि यह व्यवस्था 31 मई तक हर सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में लागू कर दी जाए।
स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार पर जोर
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल्द से जल्द सरकारी अस्पतालों में बेड क्षमता बढ़ाई जाए और स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार का काम तेज किया जाए। सरकार का कहना है कि मरीजों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाया जाएगा।
पहली बैठक से ही सरकार का बड़ा संदेश
शपथ ग्रहण के एक सप्ताह के भीतर स्वास्थ्य विभाग की यह पहली बड़ी बैठक थी। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे नई सरकार के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने साफ कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और मरीजों को लौटाने की संस्कृति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।