कोलकाता : पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों से सौहार्द की एक बेहद अनोखी और नजीर पेश करने वाली तस्वीर सामने आई है। कोलकाता नगर निगम (KMC) में सोमवार को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के पहले आधिकारिक आगमन पर दलगत राजनीति और पुरानी कड़वाहट पूरी तरह गायब दिखी। मुख्यमंत्री के बुलावे पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 'घर की सदस्य' (भावज) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पार्षद काजरी बनर्जी न केवल कार्यक्रम में शामिल हुईं, बल्कि अग्रिम पंक्ति में बैठकर इस कूटनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा बनीं।
आगे बढ़कर किया सुवेंदु का स्वागत, पहली कतार में बैठीं काजरी
सोमवार को कोलकाता नगर निगम में 'स्वच्छता अभियान' कार्यक्रम की शुरुआत के मौके पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पहुंचे थे। उनके निगम परिसर में प्रवेश करते ही टीएमसी पार्षद काजरी बनर्जी और पूर्व मेयर-परिषद सदस्य देबाशीष कुमार ने आगे बढ़कर बेहद गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को भुलाकर दोनों टीएमसी नेताओं से मुस्कुराते हुए हाथ मिलाया। इसके बाद दोपहर को हुए मुख्य कार्यक्रम में काजरी बनर्जी को मंच के ठीक सामने पहली कतार में बैठे देखा गया।
फिरहाद हकीम और माला रॉय भी मंच पर रहे मौजूद
इस ऐतिहासिक दृश्य के दौरान काजरी बनर्जी के अलावा टीएमसी के कई अन्य दिग्गज चेहरे भी मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा करते नजर आए। हाल ही में मेयर पद से इस्तीफा देने वाले फिरहाद हकीम और निगम की पूर्व चेयरपर्सन माला रॉय भी पहली कतार में सुवेंदु अधिकारी के साथ बैठी दिखीं। इसके अलावा देबाशीष कुमार, अनन्या बनर्जी, असीम बसु और जुई बिस्वास जैसे प्रमुख टीएमसी पार्षद भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। सभी विपक्षी पार्षदों का एक सुर में कहना था कि शहर के विकास और नागरिक सेवाओं को बेहतर करने के लिए वे मुख्यमंत्री की सोच और योजनाओं को जानने के लिए यहां आए हैं।
"मुख्यमंत्री ने विपक्ष को बुलाया, यह देखकर बहुत अच्छा लगा"
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों के तीखे सवालों का जवाब देते हुए काजरी बनर्जी ने कहा, "एक पार्षद के रूप में हमारा जो भी कार्यकाल बाकी है, उसमें जनता के काम सुचारू रूप से और बेहतर तरीके से हो सकें, इसी उद्देश्य से हमें बैठक में आमंत्रित किया गया था। मुख्यमंत्री ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विपक्ष के लोगों को भी बुलाया, यह देखकर वास्तव में बहुत अच्छा लगा।"
इसी बीच जब पत्रकारों ने उनसे एक राजनीतिक सवाल पूछते हुए कहा कि जांच एजेंसियां अभिषेक बनर्जी को बार-बार क्यों समन भेज रही हैं? तो इस पर काजरी ने एक बड़ी मुस्कान के साथ कहा, "इस विषय पर मुझसे कुछ मत पूछिए।"
राजनीतिक संस्कृति में आ रहे बड़े बदलाव की आहट
राजनीतिक समीक्षकों के अनुसार, हालिया वर्षों के इतिहास में बंगाल की राजनीति के लिहाज से यह तस्वीर बेहद अप्रत्याशित है। टीएमसी सरकार के समय अक्सर तत्कालीन विपक्षी दल (वामदल और बीजेपी) यह आरोप लगाते थे कि उन्हें प्रशासनिक बैठकों में अनदेखा किया जाता है और उनके क्षेत्रों में काम करने में अड़ंगा डाला जाता है। लेकिन राज्य में हुए इस बड़े फेरबदल के बाद, नई सरकार द्वारा विपक्ष को साथ लेकर और संवाद के जरिए काम आगे बढ़ाने की यह पहल राज्य की राजनीतिक संस्कृति में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रही है।