कोलकाता डेस्क : पश्चिम बंगाल की सत्ता से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बेदखल होते ही पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई है। इस सियासी फेरबदल का सीधा असर कोलकाता नगर निगम (KMC) पर पड़ा है, जहाँ पार्षदों के विद्रोह के बाद पुरबोर्ड पूरी तरह भंग हो चुका है। इस बीच, शहरवासियों के मन में उठ रहे सबसे बड़े सवाल— 'कोलकाता में पुरवोट (निकाय चुनाव) कब होंगे?'— पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को बड़ा और आधिकारिक बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी 7 दिसंबर 2026 तक कोलकाता को नया पुरबोर्ड मिल जाएगा, यानी अगले 6 महीनों के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
"सबको मेयर बनना था, नागरिक सेवाएं बंद नहीं रख सकते"
केएमसी के एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने निगम में प्रशासक बैठाए जाने की मजबूरी को जनता के सामने रखा। टीएमसी के आंतरिक कलह पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "मैंने पिछले बोर्ड से भी बात की थी, लेकिन वे इसे संभाल नहीं सके। निवर्तमान मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद जब नया मेयर चुनने के लिए दस्तखत अभियान शुरू हुआ, तो टीएमसी के 135 पार्षदों में से अधिकांश इसके खिलाफ खड़े हो गए। वहां हर कोई मेयर बनना चाहता था! अब अगर हर कोई मेयर पद की दौड़ में शामिल हो जाएगा, तो मैं कुछ नहीं कर सकता। लेकिन हम एक मिनट के लिए भी नागरिकों की सेवाएं बंद नहीं रख सकते, इसीलिए मजबूरन हमें प्रशासक नियुक्त करना पड़ा।"
मुख्यमंत्री ने कोलकाता के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा, "कोलकाता नगर निगम की अपनी एक समृद्ध विरासत है। कभी नेताजी सुभाष चंद्र बोस यहाँ के मेयर हुआ करते थे। मैं इसके गौरव और इसकी परंपरा को धूमिल होने नहीं दे सकता।"
कोलकाता के विकास के लिए 600 करोड़ का पैकेज, वार्डों का होगा पुनर्गठन
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती टीएमसी बोर्ड पर शहर के लिए कोई काम न करने का आरोप लगाया। उन्होंने एलान किया कि नई सरकार कोलकाता के शहरी परिदृश्य को बदलने और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ₹600 करोड़ की राशि आवंटित कर सकती है। आगामी चुनाव को लेकर उन्होंने कहा, "7 दिसंबर तक बोर्ड गठन से पहले वार्डों का नए सिरे से पुनर्गठन (Ward Reorganization) किया जाना बेहद जरूरी है। हमारी सरकार चाहती है कि जहां-जहां भी इस समय प्रशासक हैं, वहां जल्द से जल्द लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव हों।"
मोदी जी की तरह सबको साथ लेकर चलेंगे: सुवेंदु
राजनीति को सिर्फ चुनाव तक सीमित रखने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री ने एक बार फिर विपक्ष को साथ लेकर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, "जिस तरह से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी सबको साथ लेकर काम करते हैं, मैं भी राज्य में उसी नीति पर चलूंगा। आज के इस सरकारी कार्यक्रम में भी विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था और लगभग सभी इसमें शामिल हुए हैं। लोकतंत्र में यही सही तरीका होना चाहिए।"
कैसे ढह गया टीएमसी का किला?
गौरतलब है कि साल 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के भीतर मचे घमासान के कारण कोलकाता नगर निगम का बोर्ड समय से पहले ही बिखर गया। परिषद दल से लेकर संसदीय दल तक ममता बनर्जी की पकड़ कमजोर होने के बाद केएमसी के पार्षदों ने बगावत कर दी थी। नागरिक सेवाएं ठप न हों, इसके लिए राज्य सरकार ने आईएएस (IAS) अधिकारी स्मिता पांडेय को केएमसी का मुख्य प्रशासक नियुक्त कर पार्षदों की शक्तियां समाप्त कर दी थीं। कोलकाता में आखिरी बार निकाय चुनाव साल 2021 में हुए थे और इस बोर्ड का कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त होना था।