मुम्बई. फिच रेटिंग्स ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया। रेटिंग एजेंसी ने अप्रैल-जून तिमाही में मजबूत आर्थिक वृद्धि और अर्थव्यवस्था की समग्र मजबूती का हवाला दिया। फिच के अनुसार शेष वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि की गति धीमी पड़ने की संभावना है। अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है कि व्यापार शर्तों में बड़ी गिरावट और अमेरिकी-ईरान युद्ध के झटके के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। कुल जीडीपी वृद्धि 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
वृद्धि धीमी होने के संकेत
फिच ने कहा कि क्रय प्रबंधक सूचकांक यानी पीएमआई सर्वेक्षण के आंकड़े विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों में विस्तार की रफ्तार धीमी होने का संकेत देते हैं। सामान्य से कम मानसूनी बारिश का असर कृषि और ग्रामीण मांग की वृद्धि पर पड़ेगा। बढ़ती मुद्रास्फीति से वास्तविक आय और उपभोक्ता गतिविधियां प्रभावित होंगी। इन कारकों के कारण शेष वर्ष में वृद्धि की गति मंद पड़ सकती है। फिर भी समग्र अनुमान को ऊपर की ओर संशोधित किया गया है क्योंकि पहली तिमाही का प्रदर्शन मजबूत रहा।
निजी निवेश और ऋण वृद्धि
फिच ने कहा कि निजी निवेश की संभावनाएं अधिक मजबूत दिख रही हैं और उम्मीद है कि निवेश में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होगी। गैर-खाद्य ऋण की वृद्धि जुलाई में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत रही। ये आंकड़े अर्थव्यवस्था में मांग और निवेश की मजबूती को दर्शाते हैं। मजबूत मांग, कीमतों में वृद्धि और प्रतिकूल आपूर्ति संबंधी घटनाक्रमों को देखते हुए एजेंसी ने मौद्रिक नीति पर भी अपनी राय दी। निवेश और ऋण वृद्धि सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।
आरबीआई की संभावित दर बढ़ोतरी
फिच का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक इस साल अक्टूबर में ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.5 प्रतिशत कर देगा। इसके बाद 2027 की शुरुआत में इसमें और बढ़ोतरी कर 5.75 प्रतिशत किए जाने की उम्मीद है। फिर 2028 में दर घटकर 5.5 प्रतिशत पर आ सकती है। मजबूत मांग और मुद्रास्फीति के दबाव को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है। आरबीआई की अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में इस दिशा में फैसला संभव है।
अन्य एजेंसियों के अनुमान
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान सात प्रतिशत लगाया है। मूडीज रेटिंग्स ने भी पिछले सप्ताह सात प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया था। भारतीय अर्थव्यवस्था पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। फिच का संशोधित अनुमान अन्य एजेंसियों के करीब है और अर्थव्यवस्था की लचीलापन को रेखांकित करता है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की वृद्धि मजबूत बनी हुई है।