नई दिल्ली। EMI पर खरीदे गए मोबाइल जैसे डिवाइस की किस्तें नहीं चुकाने वाले ग्राहकों के लिए राहत की खबर है। RBI के 2026 के संशोधित ड्राफ्ट Responsible Business Conduct Directions में डिवाइस को रिमोटली प्रतिबंधित करने की व्यवस्था को काफी सख्त बनाया गया है। खास बात यह है कि सामान्य लोन की वसूली के लिए फोन को लॉक करने की अनुमति नहीं होगी। यह व्यवस्था केवल उस स्थिति में लागू हो सकती है, जब लोन खास तौर पर उसी मोबाइल डिवाइस की खरीद के लिए लिया गया हो।
हर EMI मिस होते ही फोन लॉक नहीं किया जा सकेगा
नए प्रस्ताव के तहत सिर्फ EMI की एक-दो किस्त चूकने पर बैंक या NBFC मनमाने तरीके से डिवाइस को लॉक नहीं कर सकेंगे। डिवाइस लॉकिंग को आखिरी उपाय के तौर पर रखा गया है और इसके लिए पहले से तय नोटिस और डिफॉल्ट की अवधि पूरी करनी होगी। उपलब्ध ड्राफ्ट की व्याख्याओं के अनुसार डिवाइस प्रतिबंध से पहले ग्राहक को नोटिस देकर बकाया चुकाने का मौका देना होगा।
सिर्फ उसी डिवाइस के लोन पर लागू होगा नियम
यह नियम हर तरह के लोन पर लागू नहीं होगा। अगर किसी व्यक्ति ने सामान्य पर्सनल लोन लिया है और उस पैसे से मोबाइल खरीदा है, तो उस मोबाइल को लोन रिकवरी के लिए लॉक नहीं किया जा सकेगा। प्रस्तावित व्यवस्था उस डिवाइस-फाइनेंसिंग मामले तक सीमित है, जिसमें लोन सीधे उसी मोबाइल या संबंधित डिवाइस की खरीद के लिए दिया गया हो।
फोन लॉक होने पर भी जरूरी सेवाएं बंद नहीं होंगी
अगर निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद डिवाइस पर प्रतिबंध लगाया जाता है, तब भी जरूरी सेवाओं को चालू रखना होगा। प्रस्तावित सुरक्षा उपायों में इंटरनेट एक्सेस, इनकमिंग कॉल, इमरजेंसी SOS और सरकारी या सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े जरूरी अलर्ट को बंद नहीं करने की बात कही गई है। यानी डिवाइस पर प्रतिबंध लगने के बावजूद ग्राहक जरूरी संचार और आपातकालीन सेवाओं का इस्तेमाल कर सकेगा।
लोन देने से पहले ग्राहक की सहमति और शर्तें स्पष्ट करनी होंगी
डिवाइस फाइनेंसिंग के मामले में ग्राहक को पहले से यह जानकारी देनी होगी कि भुगतान में गंभीर डिफॉल्ट होने पर डिवाइस की कुछ सुविधाओं को प्रतिबंधित किया जा सकता है। लोन एग्रीमेंट में प्रतिबंध की शर्तें, नोटिस की प्रक्रिया, डिफॉल्ट सुधारने का मौका और शिकायत दर्ज कराने का तरीका स्पष्ट होना जरूरी होगा।
निजी डेटा तक पहुंच पर भी रोक
डिवाइस को प्रतिबंधित करने का मतलब यह नहीं है कि बैंक या रिकवरी एजेंट ग्राहक के निजी डेटा तक पहुंच बना सकेंगे। RBI के डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क में भी डेटा कलेक्शन को जरूरत-आधारित और ग्राहक की पूर्व एवं स्पष्ट सहमति से जोड़कर रखा गया है। कॉन्टैक्ट्स, फोटो, वीडियो, कॉल लॉग जैसी निजी जानकारी के दुरुपयोग से बचाव पर जोर दिया गया है।
रिकवरी एजेंटों के लिए भी सख्त नियम
RBI के प्रस्तावित जिम्मेदार रिकवरी फ्रेमवर्क में बैंकों और अन्य विनियमित संस्थाओं को रिकवरी एजेंटों की नियुक्ति से पहले उचित जांच-पड़ताल और निगरानी करनी होगी। रिकवरी के दौरान धमकी, उत्पीड़न, अपमान या सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने जैसी गतिविधियों पर रोक रहेगी। एजेंटों को निर्धारित समय के भीतर ही ग्राहकों से संपर्क करना होगा। प्रस्तावित नियमों में संपर्क का समय सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक रखा गया है।
रिकवरी कॉल की रिकॉर्डिंग और एजेंटों की निगरानी
नई व्यवस्था में लोन देने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी सिर्फ एजेंट नियुक्त करने तक सीमित नहीं होगी। उन्हें रिकवरी एजेंटों के कामकाज पर निगरानी रखनी होगी और रिकवरी से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए व्यवस्था बनानी होगी। एजेंटों के व्यवहार और संपर्क प्रक्रिया को रिकॉर्ड और मॉनिटर करने पर भी जोर दिया गया है।
फोन लॉकिंग को लेकर एक जरूरी बात
यह ध्यान रखना जरूरी है कि डिवाइस लॉकिंग से जुड़े ये प्रावधान 2026 के संशोधित ड्राफ्ट नियमों का हिस्सा हैं; इन्हें हर स्थिति में तत्काल लागू हो चुके अंतिम नियम के रूप में नहीं समझना चाहिए। RBI ने इस व्यवस्था में सख्त शर्तों के साथ केवल डिवाइस-फाइनेंसिंग मामलों में सीमित प्रतिबंध की गुंजाइश रखी है।