जबलपुर के पनागर विकासखंड में शिक्षा विभाग में बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। बताया गया है कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ अकाउंटेंट विजय कुमार भलावी ने 2018 से 2026 तक फर्जी नामों पर वेतन निकालकर खुद और अपने परिवार के खाते में ट्रांसफर किया। रिटायर हुए कर्मचारियों के नाम पर भी सैलरी जारी की गई।
एफआईआर और जांच
घोटाले का खुलासा होने के बाद पनागर थाने में विजय कुमार भलावी समेत 14 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें पूर्व शिक्षा अधिकारी शैलबाला डोंगरे, त्रयंबक गणेश खरे, नरेंद्र तिवारी और अन्य शामिल हैं। पुलिस ने सभी की तलाश शुरू कर दी है और जल्द गिरफ्तारी की संभावना है।
कैसे हुआ घोटाला
भोपाल स्थित कोष-लेखा विभाग से कलेक्टर जबलपुर को सूचना मिली कि पनागर ब्लॉक में करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा हुआ है। अकाउंटेंट विजय कुमार ने अतिथि शिक्षकों और रिटायर कर्मचारियों के नाम पर हर माह वेतन निकालकर अलग-अलग 16 खातों में जमा करवाया। इसमें उनके, पत्नी और दो बेटियों के खातों के अलावा अन्य साथियों के खातों में भी राशि ट्रांसफर की गई। कुल राशि लगभग 1.11 करोड़ रुपए पहुंची।
घोटाले का मास्टरमाइंड
जांच में सामने आया कि विजय कुमार 2016 से पनागर ब्लॉक में पदस्थ था और तभी से इस फर्जीवाड़े की शुरुआत की। बीईओ कार्यालय में वह फर्जी नाम जोड़कर उन्हें शिक्षक दिखाता और उनका वेतन अपने और परिवार के खातों में ट्रांसफर कर देता। अधिकारियों को इस घोटाले की भनक तक नहीं लगी।
जिला कोषालय और शिक्षा विभाग पर भी सवाल
शिक्षा विभाग और जिला कोषालय के अधिकारियों की भी जवाबदेही पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिक्षक सूची में नए नामों को शामिल करने की जानकारी अधिकारियों को नहीं मिली, जबकि जिला कोषालय ने बिना सत्यापन लगातार वेतन निकाला। घोटाले की सूचना मिलने के बाद कलेक्टर ने बीईओ कार्यालय के सभी बैंक खातों पर रोक लगा दी है और 2016 से अब तक के रिकॉर्ड मांगे हैं।
एफआईआर में शामिल नाम
पनागर थाना में दर्ज एफआईआर में विजय कुमार भलावी, शैलबाला डोंगरे, त्रयंबक गणेश खरे, नरेंद्र तिवारी, जयंती भलावी, माधुरी भलावी, रागिनी भलावी, रानू भलावी, समीर कोष्ठा, माला कोष्ठा, अंकुश नेमा और पूर्व अतिथि शिक्षक सुचित्रा पटेल शामिल हैं।
जांच का विवरण
थाना प्रभारी ने बताया कि विजय कुमार ने बेहद चालाकी से फर्जीवाड़ा किया। उसने न केवल अपने खाते में, बल्कि पत्नी, बेटियों और अन्य फर्जी नामों के खातों में भी वेतन ट्रांसफर किया। अभी तक 16 खातों की पहचान हो चुकी है और कुल राशि 1.11 करोड़ रुपए है।]
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