राज्य सरकार सत्र 2026-27 से प्रदेश के 4500 सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं की शुरुआत करने जा रही है। नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत पहली कक्षा में प्रवेश से पहले प्री-प्राइमरी में दाखिला अनिवार्य किया गया है। अब तक करीब 2,000 स्कूलों में यह व्यवस्था लागू की गई थी। प्रवेश के लिए बच्चों की आयु तीन से साढ़े चार वर्ष निर्धारित की गई है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को औपचारिक शिक्षा से पहले खेल-खेल में सीखने का अवसर दिया जाएगा। इसी के तहत किंडरगार्टन की तर्ज पर प्री-प्राइमरी बालवाटिका कक्षाएं शुरू की जा रही हैं। सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया था। राज्य शिक्षा केंद्र ने अब प्रवेश से संबंधित दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। न्यूनतम आयु की गणना नए प्रवेश के लिए संबंधित सत्र की 31 जुलाई और पहली कक्षा के लिए 30 सितंबर से की जाएगी।
कक्षाओं को बनाया जाएगा आकर्षक
सरकारी स्कूलों में पहले सीधे पहली कक्षा में प्रवेश दिया जाता था, जबकि निजी प्ले स्कूलों में बच्चों को प्री-प्राइमरी शिक्षा दी जाती थी। इससे सरकारी स्कूल के बच्चे पिछड़ जाते थे। अब तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए रंगीन दीवारों, आकर्षक फर्नीचर और खिलौनों वाली कक्षाएं तैयार की जाएंगी। जिन स्कूल परिसरों में पहले से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हैं, वहीं इन प्री-प्राइमरी कक्षाओं का चयन किया गया है, ताकि बच्चों को शिक्षा में निरंतरता मिले।
खेल और गतिविधि आधारित पढ़ाई
इन कक्षाओं में पढ़ाई का बोझ नहीं होगा। बच्चों को एनसीईआरटी द्वारा तैयार विशेष पाठ्यक्रम ‘विद्या प्रवेश’ के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। प्रत्येक कक्षा में एलईडी स्मार्ट टीवी लगाए जाएंगे, जिनके जरिए हिंदी और अंग्रेजी वर्णमाला, गिनती और पूर्व-प्राथमिक गतिविधियां विजुअल टूल्स के माध्यम से सिखाई जाएंगी। पेंटिंग, मिट्टी के खिलौने बनाना, कविताएं और कहानी सुनाना जैसी गतिविधियों के जरिए बच्चों को सीखने का अवसर मिलेगा।
अतिथि शिक्षकों की भर्ती
प्राथमिक शिक्षकों को छोटे बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने के लिए आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए अतिथि शिक्षकों की भर्ती भी की जाएगी।
प्रवेश की आयु सीमा
नर्सरी: 3 से 4.5 वर्ष
केजी-1: 4 से 5.5 वर्ष
केजी-2: 5 से 6.5 वर्ष
पहली कक्षा: 6 से 7.5 वर्ष
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