मध्यप्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत सत्र 2026-27 के लिए निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश प्रक्रिया 13 मार्च से शुरू होगी। लेकिन प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही राज्य बोर्ड और CBSE स्कूलों में निर्धारित आयु सीमा को लेकर बड़ा अंतर सामने आया है।दोनों बोर्डों की आयु सीमा में लगभग छह माह का अंतर होने के कारण विद्यार्थियों और अभिभावकों को आने वाले समय में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
राज्य बोर्ड और CBSE में अलग-अलग आयु सीमा
राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, MP बोर्ड के स्कूलों में नर्सरी में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 3 वर्ष और अधिकतम साढ़े 4 वर्ष तय की गई है। पहली कक्षा के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष और अधिकतम 7.5 वर्ष निर्धारित है।
वहीं CBSE स्कूलों में नर्सरी के लिए 3 से 4 वर्ष और पहली कक्षा के लिए 6 से 7 वर्ष तक की आयु सीमा तय की गई है। इस प्रकार, दोनों बोर्डों के बीच लगभग छह माह का अंतर बन रहा है, जो आगे चलकर बच्चों और अभिभावकों के लिए समस्या खड़ी कर सकता है।
डिजिटल रिकार्ड के कारण बढ़ सकती है समस्या
शिक्षाविदों के अनुसार, वर्तमान समय में छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकार्ड डिजिटल रूप में दर्ज होता है। आयु सीमा में अंतर होने पर कई बार छात्र निर्धारित मानकों से अधिक या कम आयु के हो सकते हैं।
इस स्थिति में उन्हें छात्रवृत्ति, विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं या अन्य प्रवेश प्रक्रियाओं में दिक्कतें आ सकती हैं। इसलिए दोनों बोर्डों के बीच आयु सीमा को लेकर एक समान नीति बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।