कोलकाता: बच्चों और किशोरों में तंबाकू के इस्तेमाल को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। Global Youth Tobacco Survey (GYTS-4), 2019 के अनुसार, भारत में 13 से 15 वर्ष की उम्र के 8.5% स्कूली छात्र वर्तमान में किसी न किसी रूप में तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि यह आंकड़ा 2009 के 14.6% के मुकाबले कम हुआ है, लेकिन कम उम्र में तंबाकू की शुरुआत अब भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता बनी हुई है। सर्वे के मुताबिक, तंबाकू की शुरुआत कई बच्चों में 10 वर्ष की उम्र से पहले ही हो जाती है। धुआंरहित तंबाकू के इस्तेमाल की शुरुआत की औसत उम्र 9.9 वर्ष, बीड़ी के लिए 10.5 वर्ष और सिगरेट के लिए 11.5 वर्ष दर्ज की गई।
13 से 15 साल के 8.5% छात्र तंबाकू का कर रहे इस्तेमाल
GYTS-4 के अनुसार, 13-15 वर्ष के छात्रों में वर्तमान तंबाकू इस्तेमाल की राष्ट्रीय दर 8.5% थी। इनमें लड़कों की दर 9.6% और लड़कियों की दर 7.4% थी। सर्वे में यह भी सामने आया कि करीब 29.5% छात्रों को किसी न किसी स्थान पर सेकेंड-हैंड स्मोक के संपर्क में आने की बात सामने आई थी। हालांकि, इन आंकड़ों को 2019 में किए गए सर्वे का राष्ट्रीय डेटा समझना जरूरी है। इसे 2026 की मौजूदा स्थिति का प्रत्यक्ष अनुमान नहीं माना जा सकता।
10 साल से पहले शुरुआत की तस्वीर भी सामने आई
सर्वे में शुरुआती उम्र से जुड़े आंकड़े विशेष रूप से चिंता पैदा करते हैं। करीब 52% उन छात्रों ने, जो धुआंरहित तंबाकू का इस्तेमाल करते थे, 10 साल की उम्र से पहले इसकी शुरुआत की थी। बीड़ी इस्तेमाल करने वालों में यह अनुपात 47% और सिगरेट इस्तेमाल करने वालों में 38% था। सर्वे में दर्ज औसत शुरुआत की उम्र भी कम रही—धुआंरहित तंबाकू के लिए 9.9 वर्ष, बीड़ी के लिए 10.5 वर्ष और सिगरेट के लिए 11.5 वर्ष।
दुकानों से कम उम्र में भी मिल रहे थे तंबाकू उत्पाद
GYTS-4 में तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आया। वर्तमान सिगरेट पीने वाले छात्रों में 69% और बीड़ी पीने वाले छात्रों में 78% ने बताया कि उन्होंने दुकान, पान की दुकान, स्ट्रीट वेंडर या वेंडिंग मशीन से उत्पाद खरीदे थे। इनमें जिन छात्रों ने सिगरेट या बीड़ी खरीदी, उनमें 45% सिगरेट खरीदने वालों और 47% बीड़ी खरीदने वालों ने कहा कि उम्र कम होने के बावजूद उनसे बिक्री से इनकार नहीं किया गया।
COTPA के तहत नाबालिगों को तंबाकू बेचने पर रोक
भारत में COTPA, 2003 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को तंबाकू उत्पाद बेचना प्रतिबंधित है। इसके अलावा किसी शैक्षणिक संस्थान के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर भी रोक है। इसके बावजूद GYTS के आंकड़ों में कम उम्र के छात्रों द्वारा दुकानों से तंबाकू उत्पाद खरीदने की बात सामने आना कानून के क्रियान्वयन से जुड़े सवाल उठाता है।
तंबाकू मुक्त स्कूलों पर भी जोर
केंद्र सरकार ने स्कूलों में तंबाकू की पहुंच रोकने के लिए Tobacco-Free Educational Institutions (ToFEI) दिशानिर्देश लागू किए हैं। सरकार के अनुसार, इनका उद्देश्य स्कूल परिसर को तंबाकू से मुक्त रखना और छात्रों को तंबाकू के इस्तेमाल से बचाना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं। स्कूलों के आसपास बिक्री पर निगरानी, उम्र की जांच और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ तंबाकू इस्तेमाल करने वाले किशोरों के लिए उचित काउंसलिंग और सहायता भी जरूरी है।
बच्चों में तंबाकू की शुरुआत रोकना बड़ी चुनौती
GYTS के आंकड़े बताते हैं कि भारत में किशोरों के बीच तंबाकू का वर्तमान इस्तेमाल पिछले सर्वे की तुलना में कम हुआ है, लेकिन कम उम्र में शुरुआत अब भी चिंता का विषय है। 2009 में 13-15 वर्ष के छात्रों में वर्तमान तंबाकू इस्तेमाल 14.6% था, जो 2019 में घटकर 8.5% हुआ। इसलिए चुनौती केवल तंबाकू इस्तेमाल करने वाले बच्चों की संख्या कम करने की नहीं, बल्कि बच्चों को कम उम्र में इसकी शुरुआत से रोकने की भी है।