तेहरान/वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की कोशिशों में ईरान गंभीर तकनीकी चुनौतियों से जूझ रहा है। बताया जा रहा है कि समुद्र में बिछाई गई माइंस (समुद्री सुरंगें) की पहचान और उन्हें सुरक्षित तरीके से हटाना फिलहाल सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है, जिससे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की बहाली में देरी हो रही है।
समुद्री माइंस हटाने में तकनीकी दिक्कत
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के पास सीमित तकनीकी संसाधन होने के कारण वह जलडमरूमध्य में बिछी सुरंगों को पूरी तरह साफ नहीं कर पा रहा है। यही वजह है कि एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद इस मार्ग को जहाजों के लिए सुरक्षित घोषित नहीं किया जा सका है।
अमेरिका का दबाव, वार्ता पर नजर
इस बीच अमेरिका ने होर्मुज को जल्द खोलने पर जोर दिया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शांति वार्ता के सिलसिले में इस्लामाबाद पहुंचे हैं, जहां ईरान के साथ बातचीत होने की संभावना है। इन चर्चाओं में जलडमरूमध्य का मुद्दा केंद्र में रहने वाला है।
ट्रंप की शर्त और ईरान का रुख
रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में तनाव खत्म करने के लिए होर्मुज का खुलना जरूरी है। वहीं ईरान अपने प्रस्ताव में इस रणनीतिक मार्ग पर नियंत्रण बनाए रखने की मांग पर अड़ा हुआ है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा असर
होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय से बंद होने के कारण वैश्विक तेल सप्लाई पर असर पड़ा है। भारत समेत कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है और बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। यह मार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन रास्तों में से एक माना जाता है।
युद्धविराम के बीच उम्मीद
मार्च के अंत में अमेरिका की ओर से ईरान पर दबाव बढ़ाने के बाद शांति प्रस्ताव को लेकर समयसीमा तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ा दिया गया। पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों पक्षों के बीच अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ है, जिससे वार्ता के जरिए समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही है।