कोलकाता डेस्क: खाना खाने के बाद बर्तन धोना कई लोगों को सबसे ज्यादा मेहनत वाला काम लगता है। इसी वजह से कई लोग बर्तनों में पानी और थोड़ा सा डिश सोप डालकर उन्हें रातभर सिंक में छोड़ देते हैं। ऐसा माना जाता है कि सुबह तक बर्तनों पर चिपका खाना आसानी से निकल जाएगा। हालांकि, हर तरह के बर्तन को लंबे समय तक पानी में भिगोकर रखना जरूरी नहीं है। सिंक में गंदे बर्तन और खाने के अवशेष लंबे समय तक पड़े रहने से किचन में नमी और गंदगी बनी रह सकती है। ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
रातभर बर्तन भिगोकर रखने से क्या परेशानी हो सकती है?
गंदे बर्तनों पर खाने के छोटे-छोटे टुकड़े और अवशेष रह जाते हैं। जब इन्हें लंबे समय तक पानी में छोड़ दिया जाता है, तो सिंक के आसपास लगातार नमी बनी रहती है। खासकर अगर कई गंदे बर्तन एक साथ रखे हों, तो सफाई का स्तर और खराब हो सकता है। खाने के अवशेष और नमी वाली जगहों पर बैक्टीरिया के बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, हर बर्तन को रातभर भिगोने से कोई खास फायदा नहीं होता। जिस बर्तन में खाना ज्यादा चिपका हो, उसे कुछ समय के लिए पानी में भिगोना पर्याप्त है। इसके बाद डिश सोप और पानी से अच्छी तरह धोकर उसे साफ कर देना चाहिए। बर्तन धोने के बाद उन्हें सूखी जगह पर रखना भी जरूरी है।
सिंक में पड़े खाने से चींटियां और कॉकरोच हो सकते हैं आकर्षित
रातभर सिंक में गंदे बर्तन छोड़ने की एक और परेशानी कीड़ों से जुड़ी है। बर्तनों में बचे खाने के छोटे टुकड़े और उनकी गंध चींटियों और कॉकरोच जैसे कीड़ों को आकर्षित कर सकती है। अगर किचन में उन्हें लगातार खाने और नमी का स्रोत मिलता रहे, तो उनकी मौजूदगी बढ़ सकती है। कई बार सिंक में दिखाई न देने वाले छोटे खाद्य कण भी कीड़ों के लिए पर्याप्त होते हैं। इसलिए सिर्फ बर्तन धोना ही काफी नहीं है, बल्कि सिंक को भी साफ रखना जरूरी है। बर्तन धोने के बाद सिंक में गिरे खाने के टुकड़ों को तुरंत हटा दें। इससे किचन में गंदगी और कीड़ों की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
लकड़ी के बर्तनों और कटिंग बोर्ड का रखें खास ध्यान
लकड़ी के चम्मच, कटिंग बोर्ड और लकड़ी से बनी दूसरी किचन चीजों को लंबे समय तक पानी में भिगोकर रखना ठीक नहीं माना जाता। लकड़ी पानी को सोख सकती है और लंबे समय तक नमी रहने पर उसमें सीलन की समस्या हो सकती है। लकड़ी की सतह पर मौजूद छोटी दरारों या छेदों में गंदगी और खाने के अवशेष जमा हो सकते हैं। यही वजह है कि लकड़ी के बर्तनों को जरूरत से ज्यादा देर तक पानी में नहीं छोड़ना चाहिए। इन्हें इस्तेमाल के बाद साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद अतिरिक्त पानी पोंछकर इन्हें पूरी तरह सूखने दें। खासकर कटिंग बोर्ड को इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह सुखाना जरूरी है।
सोने से पहले सिंक की सफाई जरूर करें
कोशिश करें कि रात में सोने से पहले गंदे बर्तनों को धोकर रख दें। अगर किसी बर्तन पर खाना ज्यादा चिपका हुआ है, तो उसे थोड़ी देर पानी में भिगोकर बाद में साफ किया जा सकता है। सिंक में पड़े खाने के टुकड़ों को भी तुरंत हटा दें। गीले स्पंज और कपड़े को भी लंबे समय तक गीला छोड़ने के बजाय नियमित रूप से साफ और सूखा रखना चाहिए। किचन की सतह पर अगर कच्चे मांस का रस या अवशेष गिर जाए, तो उस जगह को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करें। कूड़ेदान को भी समय-समय पर खाली करते रहें। इन छोटी-छोटी आदतों से किचन को साफ और व्यवस्थित रखने में मदद मिल सकती है।
सिर्फ बर्तन नहीं, पूरे सिंक की सफाई भी जरूरी
कई बार लोग बर्तन साफ करने के बाद सिंक की सफाई को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि बर्तन धोते समय खाने के छोटे टुकड़े सिंक में जमा हो सकते हैं। इन अवशेषों को लंबे समय तक वहीं छोड़ना किचन की सफाई के लिए अच्छी आदत नहीं है। सिंक को पानी से साफ करने के साथ समय-समय पर उसकी अच्छी तरह सफाई भी करनी चाहिए। सिंक के आसपास पानी जमा न रहने दें और जरूरत पड़ने पर उसे सूखे कपड़े से पोंछ दें। स्पंज और स्क्रबर को भी साफ रखना जरूरी है। खासकर जिस स्पंज से रोजाना बर्तन धोए जाते हैं, उसकी स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए।
छोटी आदतों से किचन रहेगा ज्यादा साफ
रात में बर्तन साफ करके रखना रोजाना की एक अच्छी सफाई की आदत हो सकती है। अगर हर दिन ऐसा करना संभव न हो, तो कम से कम खाने के अवशेष बर्तनों से हटाकर उन्हें लंबे समय तक गंदा न छोड़ें। ज्यादा चिपके खाने वाले बर्तनों को जरूरत के मुताबिक कुछ समय के लिए भिगोया जा सकता है। लकड़ी के बर्तनों को लंबे समय तक पानी में रखने से बचें और उन्हें अच्छी तरह सुखाएं। सिंक, स्पंज, किचन की सतह और कूड़ेदान की नियमित सफाई भी जरूरी है। इससे नमी और खाने के अवशेषों को लंबे समय तक जमा होने से रोका जा सकता है। साफ-सफाई की ये छोटी आदतें किचन को ज्यादा स्वच्छ और व्यवस्थित रखने में मदद कर सकती हैं।