भोपाल | मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इन दिनों वह ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकाल रहे हैं, जिसका पहला चरण पूरा हो चुका है। दिग्विजय सिंह इस यात्रा को गैर-राजनीतिक बता रहे हैं। अब उन्होंने यात्रा के पीछे के दो प्रमुख मकसद भी बताए हैं। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, यात्रा का पहला उद्देश्य लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। वहीं, दूसरा मकसद राम मंदिर निर्माण के नाम पर जुटाए गए चंदे का हिसाब मांगना है।
लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर जोर
दिग्विजय सिंह ने कहा कि आज उनके सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि देश में लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा या नहीं। उनके अनुसार, स्वस्थ लोकतंत्र के लिए निष्पक्ष चुनाव आयोग का होना जरूरी है। उन्होंने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, वोटर लिस्ट की पारदर्शिता और ईवीएम से जुड़े मुद्दे उठाए। उनका कहना है कि हर नागरिक का नाम मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज होना चाहिए और उसका वोट उसी उम्मीदवार को जाना चाहिए, जिसे वह चुनना चाहता है।
चुनाव आयोग पर दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी लड़ाई चुनाव के नतीजों को लेकर नहीं, बल्कि नागरिकों के मतदान के अधिकारों को लेकर है। उन्होंने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने वीवीपैट पर्ची को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि मतदाता को केवल कुछ सेकेंड के लिए पर्ची दिखाने के बजाय उसे वीवीपैट की पर्ची अपने हाथ में मिलनी चाहिए, ताकि वह अपने मतदान की पुष्टि खुद कर सके। इसके अलावा उन्होंने ईवीएम के सॉफ्टवेयर को सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराने की मांग भी की।
पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची का दिया उदाहरण
दिग्विजय सिंह ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां करीब 70 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए और चुनाव के बाद फिर जोड़े गए। उन्होंने इस मुद्दे को चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जोड़ते हुए सवाल उठाए। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ के जरिए वह लोकतंत्र, निष्पक्ष चुनाव और राम मंदिर निर्माण के नाम पर जुटाए गए चंदे का हिसाब जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं।