जबलपुर. मध्य प्रदेश में अंतर्राज्यीय परिवहन चेक पोस्ट को फिर से शुरू करने के मुद्दे पर बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने ही पूर्व आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसमें राज्य की सीमाओं पर बंद पड़ी सभी अंतर्राज्यीय चेक पोस्ट को 30 दिनों के भीतर पुनः शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने परिवहन विभाग द्वारा दायर रिव्यू याचिका पर सुनवाई करते हुए यह स्टे आदेश जारी किया। अदालत के इस फैसले के बाद फिलहाल प्रदेश में बंद पड़ी चेक पोस्ट दोबारा नहीं खुलेंगी।
परिवहन विभाग की रिव्यू याचिका पर हुई सुनवाई
राज्य सरकार की ओर से दाखिल रिव्यू याचिका में हाईकोर्ट के पूर्व आदेश पर पुनर्विचार की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए पहले दिए गए आदेश को स्थगित कर दिया। साथ ही परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह और परिवहन आयुक्त उमेश जोगा को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत अब इस मामले में विस्तृत पक्ष सुनने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगी। इस घटनाक्रम ने परिवहन प्रशासन और सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
ओवरलोडिंग और खराब सड़कों को लेकर दायर हुई थी जनहित याचिका
यह पूरा मामला सतना निवासी रजनीश त्रिपाठी द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा हुआ है। याचिका में कहा गया था कि प्रदेश की सड़कों पर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, जिससे सड़कें तेजी से खराब हो रही हैं और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि अंतर्राज्यीय चेक पोस्ट बंद होने के कारण ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इसी मामले की सुनवाई के दौरान सरकार ने पहले अदालत को आश्वासन दिया था कि ओवरलोडिंग रोकने के लिए चेक पोस्टों का संचालन जारी रखा जाएगा।
1050 करोड़ रुपये खर्च कर बनाई गई थीं चेक पोस्ट
राज्य सरकार ने सीमावर्ती इलाकों में परिवहन निगरानी को मजबूत करने के लिए लगभग 1050 करोड़ रुपये का निवेश कर 19 अंतर्राज्यीय चेक पोस्ट स्थापित किए थे। इन चेक पोस्टों का उद्देश्य ओवरलोड वाहनों पर नियंत्रण, कर वसूली और परिवहन नियमों का पालन सुनिश्चित करना था। हालांकि बाद में सरकार ने इन्हें बंद कर दिया, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने अदालत में अवमानना याचिका दायर की। उनका कहना था कि सरकार ने अदालत को दिए गए आश्वासन का पालन नहीं किया और बिना पर्याप्त कारण चेक पोस्ट बंद कर दीं।
अदालत के फैसले से परिवहन व्यवस्था पर बढ़ी नजर
हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब राज्य की परिवहन व्यवस्था और ओवरलोडिंग नियंत्रण प्रणाली पर नई बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि चेक पोस्ट बंद होने से राजस्व नुकसान और सड़क क्षति जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जबकि दूसरी ओर सरकार और परिवहन क्षेत्र से जुड़े कुछ पक्ष इसे भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी से जोड़कर देखते रहे हैं। अदालत की आगामी सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकेगा कि चेक पोस्टों का भविष्य क्या होगा और राज्य सरकार इस व्यवस्था को किस रूप में लागू करना चाहती है।
अगली सुनवाई पर टिकी सभी की नजरें
फिलहाल हाईकोर्ट द्वारा दिए गए स्टे के बाद अंतर्राज्यीय आरटीओ चेक पोस्ट खोलने की प्रक्रिया रुक गई है। अब सभी की निगाहें अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां परिवहन विभाग और याचिकाकर्ता दोनों अपने-अपने तर्क रखेंगे। यह मामला केवल चेक पोस्ट संचालन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे सड़क सुरक्षा, सरकारी जवाबदेही और परिवहन नीति जैसे व्यापक मुद्दे भी जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में अदालत का अंतिम निर्णय राज्य की परिवहन व्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।