नई दिल्ली. बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिमी हिस्से में बना गहरा दबाव अब पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के 23 सितंबर के पूर्वानुमान के अनुसार, यह प्रणाली सुबह आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम से करीब 60 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, विशाखापत्तनम से 140 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व और ओडिशा के गोपालपुर से करीब 150 किलोमीटर दक्षिण में केंद्रित थी। इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने और 23 सितंबर की रात उत्तर आंध्र प्रदेश तथा दक्षिण ओडिशा के बीच तट पार करने की संभावना जताई गई है।
इस मौसम प्रणाली का सबसे तत्काल प्रभाव तटीय आंध्र प्रदेश और ओडिशा के इलाकों में दिखाई देने की संभावना है। समुद्र की स्थिति भी खराब से बहुत खराब रहने का अनुमान है और कई तटीय हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के समुद्री बुलेटिन में दक्षिण ओडिशा तट पर 30 से 35 नॉट की हवा और झोंकों के साथ 45 नॉट तक की रफ्तार दर्ज होने का अनुमान दिया गया है। ऐसे में तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तथा समुद्र में जाने वाले मछुआरों के लिए विशेष सतर्कता जरूरी हो जाती है।
ओडिशा और आंध्र प्रदेश में बारिश के साथ तेज हवाओं का असर
ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय हिस्सों में इस प्रणाली का प्रभाव सबसे पहले और अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में व्यापक बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान जताया है। दक्षिण ओडिशा तट पर समुद्र बहुत खराब से ऊंची लहरों वाली स्थिति में पहुंच सकता है, जबकि उत्तर आंध्र तट पर भी तेज हवाओं और भारी बारिश का दौर बन सकता है। स्थानीय बंदरगाहों पर सावधानी संबंधी संकेत भी जारी किए गए हैं।
मौसम प्रणाली के तट पार करने के बाद भी इसके प्रभाव से आसपास के राज्यों में बारिश जारी रह सकती है। खासकर आंध्र प्रदेश और ओडिशा के भीतरी हिस्सों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ वर्षा होने की संभावना बनी हुई है। ऐसे मौसम में निचले इलाकों में पानी भरने, पेड़ और कमजोर ढांचे गिरने तथा स्थानीय यातायात प्रभावित होने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। तटीय क्षेत्रों में समुद्र की स्थिति खराब रहने के कारण समुद्री गतिविधियों को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में भी भारी बारिश का खतरा
गहरे दबाव के पश्चिम की ओर बढ़ने का असर मध्य भारत के कुछ हिस्सों पर भी पड़ सकता है। छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना के कारण मौसम पर विशेष नजर बनी हुई है। इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर बहुत तेज वर्षा के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में सक्रिय यह मौसम प्रणाली मध्य भारत के उन इलाकों तक नमी पहुंचा सकती है जहां मानसूनी गतिविधियां अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
छत्तीसगढ़ में तेज बारिश की स्थिति में निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय यातायात बाधित होने की आशंका बढ़ सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पानी जमा होने के साथ फसलों पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर तेलंगाना में भी भारी वर्षा के दौरान शहरी जलभराव की समस्या सामने आ सकती है। गरज-चमक के दौरान खुले क्षेत्रों में सावधानी बरतना और मौसम विभाग की स्थानीय चेतावनियों का पालन करना जरूरी होगा।
बिहार, झारखंड से पश्चिम बंगाल तक सक्रिय रहेगा मौसम
पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी इस मौसम प्रणाली के प्रभाव से बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इन राज्यों के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में भारी वर्षा की स्थिति बन सकती है। झारखंड और बिहार में बारिश का असर अगले कुछ दिनों तक बने रहने की संभावना है। इस दौरान स्थानीय स्तर पर जलभराव और यातायात से जुड़ी परेशानियां पैदा हो सकती हैं।
पश्चिम बंगाल और सिक्किम के इलाकों में भी बादलों की सक्रियता बनी रह सकती है। पहाड़ी और ढलान वाले क्षेत्रों में लगातार बारिश होने पर स्थानीय स्तर पर भूस्खलन जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है। नदियों और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों को भी स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देना होगा। मौसम प्रणाली के आगे बढ़ने के साथ बारिश का वितरण अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रह सकता है।
महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भी बारिश
महाराष्ट्र के कोंकण, गोवा और मराठवाड़ा समेत कुछ हिस्सों में भी मौसम सक्रिय रहने की संभावना है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी कई क्षेत्रों में बारिश को बढ़ावा दे सकती है। मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में गरज-चमक के साथ तेज हवाओं की स्थिति भी बन सकती है। स्थानीय स्तर पर बारिश की तीव्रता में काफी अंतर हो सकता है, इसलिए जिला स्तर की चेतावनियां अधिक महत्वपूर्ण रहेंगी।
दक्षिण भारत में कर्नाटक, केरल और आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। तटीय कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बनी रह सकती है, जबकि आंतरिक कर्नाटक और केरल में भी कई स्थानों पर वर्षा हो सकती है। इस दौरान गरज-चमक के साथ अचानक तेज हवाएं चलने की स्थिति में खुले स्थानों, पेड़ों और कमजोर ढांचों से दूरी बनाए रखना सुरक्षित रहेगा।
दिल्ली में मानसून की विदाई, मौसम अपेक्षाकृत शांत
पूर्वी और मध्य भारत में मौसम सक्रिय रहने के बीच राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की तस्वीर अपेक्षाकृत अलग है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 23 सितंबर को दिल्ली से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी हो गई है। विभाग के उपलब्ध मानकों के अनुसार मानसून की वापसी केवल तारीख पर आधारित नहीं होती, बल्कि बारिश में लगातार कमी, निचले वायुमंडल में हवा के बदलाव और नमी घटने जैसे संकेतों को भी देखा जाता है।
24 सितंबर को दिल्ली-एनसीआर में किसी बड़ी मौसम चेतावनी की स्थिति नहीं है और राजधानी में मौसम अपेक्षाकृत शांत रहने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग की 23 सितंबर की चेतावनी सूची में दिल्ली के लिए 24 से 29 सितंबर तक कोई चेतावनी दर्ज नहीं है। इसका अर्थ यह है कि पूर्वी और मध्य भारत में जहां मौसम प्रणाली का प्रभाव सक्रिय रहेगा, वहीं दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में फिलहाल भारी बारिश जैसी स्थिति की संभावना कम है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में फिर बढ़ सकती है बारिश
उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी रह सकती है, जबकि पश्चिमी हिस्सों में बाद के दिनों में मौसम सक्रिय होने के संकेत हैं। सितंबर के अंतिम सप्ताह में बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी और स्थानीय मौसमी परिस्थितियां मिलकर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का कारण बन सकती हैं।
उत्तराखंड में भी मौसम पूरी तरह शांत होने में अभी समय लग सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान सड़क यातायात, भूस्खलन और स्थानीय जलधाराओं के उफान जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। खासकर उन इलाकों में जहां पहले से मिट्टी कमजोर है, वहां लगातार बारिश के दौरान अतिरिक्त सतर्कता आवश्यक होगी। पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वालों के लिए स्थानीय मौसम और सड़क संबंधी सूचनाओं पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
मानसून की विदाई के बीच मौसम ने बदला रंग
सितंबर के अंतिम सप्ताह में भारत के मौसम का यह बदलाव मानसून की वापसी और बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली, दोनों को एक साथ दिखा रहा है। एक ओर उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों से मानसून पीछे हट रहा है, वहीं दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव पूर्वी और मध्य भारत में बारिश को सक्रिय कर रहा है। यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में एक ही समय पर मौसम के बिल्कुल अलग रूप देखने को मिल रहे हैं।
फिलहाल सबसे अधिक ध्यान उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा तट पर केंद्रित है, जहां मौसम विभाग के अनुसार गहरा दबाव 23 सितंबर की रात तट पार कर सकता है। इसके बाद इसका प्रभाव आसपास के राज्यों में बारिश और तेज हवाओं के रूप में बना रह सकता है। हालांकि इसे चक्रवात बताना अभी सही नहीं होगा, क्योंकि मौसम विभाग ने इसे गहरे दबाव की श्रेणी में रखा है। आने वाले 24 से 48 घंटे में इसकी दिशा और तीव्रता के आधार पर बारिश का प्रभाव और स्पष्ट होगा।