नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को संगठन में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए 7 अलग-अलग मोर्चों के प्रभारियों की घोषणा की। पार्टी की ओर से जारी नियुक्तियों में युवा, महिला, एससी, ओबीसी, किसान, एसटी और अल्पसंख्यक मोर्चों की जिम्मेदारी अलग-अलग वरिष्ठ नेताओं को सौंपी गई है। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने अपने सामाजिक और संगठनात्मक आधार से जुड़े विभिन्न वर्गों के बीच गतिविधियों को और मजबूत करने का संकेत दिया है। बस्ती से सांसद हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है, जबकि राजस्थान के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया को एसटी मोर्चे की जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा कई राज्यों में संगठन और चुनावी राजनीति का अनुभव रखने वाले नेताओं को भी अहम मोर्चों की जिम्मेदारी दी गई है।
हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चे की कमान
बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी को भाजपा युवा मोर्चा का प्रभारी बनाए जाने को संगठन की युवा रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। युवा मोर्चा पार्टी के लिए नए मतदाताओं और युवा कार्यकर्ताओं तक पहुंच बनाने का प्रमुख माध्यम है। ऐसे में इस जिम्मेदारी के सामने संगठन विस्तार, युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और पार्टी की नीतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने जैसी बड़ी चुनौतियां रहेंगी। हरीश द्विवेदी पहले भी संगठन से जुड़े विभिन्न दायित्व निभा चुके हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। पार्टी के लिए युवा वर्ग के बीच संवाद और संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत करना आने वाले समय में इस मोर्चे की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।
महिला मोर्चे की जिम्मेदारी डी. पुरंदेश्वरी को
आंध्र प्रदेश भाजपा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डी. पुरंदेश्वरी को महिला मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। दक्षिण भारत की राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों का उनका अनुभव इस जिम्मेदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। महिला मतदाताओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी को देखते हुए सभी दलों के लिए महिला संगठन का महत्व लगातार बढ़ा है। भाजपा भी महिला केंद्रित योजनाओं और संगठनात्मक संपर्क को अपने राजनीतिक विस्तार का महत्वपूर्ण आधार मानती रही है। ऐसे में डी. पुरंदेश्वरी के सामने महिला कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ने, राज्यों में मोर्चे की गतिविधियों को गति देने और महिला मतदाताओं के साथ पार्टी का संवाद मजबूत करने की चुनौती होगी।
एससी और ओबीसी मोर्चे में अनुभवी नेताओं पर भरोसा
एससी मोर्चे की जिम्मेदारी हरियाणा से जुड़े भाजपा नेता संजय भाटिया को दी गई है। वे वर्तमान में राज्यसभा सदस्य होने के साथ पार्टी संगठन में राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। संगठनात्मक अनुभव के कारण उन्हें अनुसूचित जाति वर्ग के बीच पार्टी की पहुंच और गतिविधियों को मजबूत करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। वहीं ओबीसी मोर्चे का प्रभार ओडिशा के वरिष्ठ नेता बैजयंत पांडा को सौंपा गया है। वे भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और केंद्रपाड़ा से लोकसभा सदस्य रह चुके हैं। ओडिशा में भाजपा के राजनीतिक विस्तार और विधानसभा चुनाव में पार्टी की सफलता के दौरान उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
किसान मोर्चे की जिम्मेदारी लाल सिंह आर्या को
किसान मोर्चे का प्रभार लाल सिंह आर्या को सौंपा गया है। कृषि और ग्रामीण मतदाताओं से जुड़े मुद्दे भाजपा की राजनीतिक रणनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। ऐसे में किसान मोर्चे की जिम्मेदारी का सीधा संबंध ग्रामीण क्षेत्रों में संगठनात्मक संपर्क मजबूत करने और किसानों से जुड़े मुद्दों को पार्टी के राजनीतिक संवाद से जोड़ने से होगा। देश के अलग-अलग राज्यों में कृषि संबंधी परिस्थितियां और किसानों की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं, इसलिए मोर्चे के सामने स्थानीय स्तर पर प्रभावी संगठन तैयार करने की चुनौती भी रहेगी। पार्टी के लिए किसान संगठनों और ग्रामीण कार्यकर्ताओं के बीच निरंतर संपर्क बनाए रखना इस जिम्मेदारी का अहम हिस्सा हो सकता है।
एसटी मोर्चे में सतीश पूनिया को बड़ी जिम्मेदारी
राजस्थान के वरिष्ठ भाजपा नेता सतीश पूनिया को अनुसूचित जनजाति मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। राजस्थान की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे पूनिया का संगठनात्मक अनुभव इस दायित्व में पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है। अनुसूचित जनजाति वर्ग देश के कई राज्यों में महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक भूमिका रखता है। मध्य भारत, पश्चिमी भारत और पूर्वोत्तर सहित कई क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों के बीच राजनीतिक पहुंच मजबूत करना प्रमुख दलों की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे में सतीश पूनिया की जिम्मेदारी केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि विभिन्न राज्यों में जनजातीय समाज के साथ पार्टी के संवाद और संपर्क को विस्तार देने पर भी ध्यान केंद्रित रह सकता है।
अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी गजेंद्र पटेल को
भाजपा ने अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी गजेंद्र पटेल को दी है। पार्टी के लिए अल्पसंख्यक समुदायों के बीच संगठनात्मक संपर्क बढ़ाना लंबे समय से एक महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती रहा है। इस मोर्चे के माध्यम से पार्टी की कोशिश विभिन्न समुदायों तक अपनी नीतियों और कार्यक्रमों की जानकारी पहुंचाने तथा स्थानीय स्तर पर संवाद को मजबूत करने की हो सकती है। अलग-अलग राज्यों में अल्पसंख्यक समुदायों की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां भिन्न हैं, इसलिए मोर्चे को क्षेत्रवार रणनीति के साथ काम करना होगा। नई नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब भाजपा अपने संगठनात्मक ढांचे को विभिन्न सामाजिक समूहों तक और व्यापक बनाने पर जोर दे रही है।
सामाजिक समीकरणों पर भाजपा का फोकस
7 मोर्चों के प्रभारियों की नियुक्ति को भाजपा के व्यापक संगठनात्मक ढांचे के संदर्भ में देखा जा सकता है। युवा, महिला, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, किसान, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदाय पार्टी के सामाजिक विस्तार की रणनीति में अलग-अलग महत्व रखते हैं। इन मोर्चों के माध्यम से भाजपा अपने केंद्रीय संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय मजबूत करती है। नई जिम्मेदारियां संभालने वाले नेताओं के सामने राज्यों तक संगठनात्मक गतिविधियों को पहुंचाने और संबंधित सामाजिक वर्गों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने की चुनौती होगी। आने वाले समय में इन नियुक्तियों का असर पार्टी के कार्यक्रमों, सदस्यता गतिविधियों और विभिन्न राज्यों में संगठन विस्तार के स्तर पर दिखाई दे सकता है।