नई दिल्ली. ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर और मरम्मत की जरूरत वाले सरकारी स्कूलों को लेकर एक नई राजनीतिक बहस सामने आई है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने स्कूलों की मरम्मत के लिए पीएम केयर्स कोष के इस्तेमाल की मांग उठाई थी। उनकी इस अपील के बाद भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को तीखी प्रतिक्रिया दी और इस मुद्दे को आम आदमी पार्टी से जोड़ते हुए उसके नेतृत्व पर निशाना साधा। भाजपा की गोवा इकाई ने सोशल मीडिया के माध्यम से दिपके की मांग पर सवाल उठाने के साथ-साथ आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल पर भी राजनीतिक कटाक्ष किया।
पीएम केयर्स कोष के उद्देश्य पर भाजपा का जवाब
भाजपा की गोवा इकाई ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि पीएम केयर्स कोष का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों और आपदा राहत से संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करना है। पार्टी ने इसी आधार पर ग्रामीण स्कूलों की सामान्य मरम्मत के लिए इस कोष के इस्तेमाल की मांग को लेकर दिपके पर निशाना साधा। भाजपा का तर्क था कि कोष की प्रकृति और उद्देश्य को समझे बिना इस प्रकार की मांग करना उचित नहीं है। इस प्रतिक्रिया के जरिए पार्टी ने बहस को केवल स्कूलों की स्थिति तक सीमित रखने के बजाय पीएम केयर्स कोष के उपयोग और उसके निर्धारित उद्देश्य की ओर मोड़ दिया।
केजरीवाल को लेकर भाजपा ने किया तीखा राजनीतिक कटाक्ष
भाजपा ने अपनी प्रतिक्रिया में अरविंद केजरीवाल को भी सीधे निशाने पर लिया। गोवा भाजपा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों को राजनीतिक प्रदर्शन और बयानबाजी तो सिखाई गई, लेकिन बुनियादी तथ्यों की जानकारी नहीं दी गई। पार्टी ने दिपके और आम आदमी पार्टी के बीच कथित राजनीतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए इस पूरे प्रकरण को केजरीवाल की राजनीति से जोड़ने का प्रयास किया। हालांकि भाजपा की यह टिप्पणी मुख्य रूप से राजनीतिक आरोप और कटाक्ष के रूप में सामने आई है, जिसके जवाब में संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस विवाद की अगली दिशा तय कर सकती है।
पंजाब के स्कूलों को लेकर भी भाजपा ने उठाए सवाल
भाजपा की गोवा इकाई ने अपने पलटवार को पंजाब तक पहुंचाते हुए दिपके को वहां के सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करने की चुनौती दी। पार्टी ने आम आदमी पार्टी शासित पंजाब में शिक्षा व्यवस्था को लेकर कटाक्ष किया और दावा किया कि राज्य के लोग वहां के तथाकथित विश्वस्तरीय स्कूलों से परेशान हैं। इस बयान के जरिए भाजपा ने शिक्षा के मुद्दे को दोनों राजनीतिक दलों के बीच व्यापक राजनीतिक मुकाबले से जोड़ने की कोशिश की। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार लंबे समय से शिक्षा क्षेत्र में सुधार को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाती रही है, इसलिए भाजपा का हमला सीधे उसी दावे को चुनौती देता दिखाई दिया।
शिक्षा व्यवस्था बनी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र
सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। एक ओर राजनीतिक दल सरकारी विद्यालयों के बुनियादी ढांचे, शिक्षण सुविधाओं और गुणवत्ता में सुधार को अपनी प्राथमिकता बताते हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इन्हीं दावों की जमीनी स्थिति पर सवाल उठाते हैं। इस मामले में भी ग्रामीण स्कूलों की मरम्मत की मांग से शुरू हुई चर्चा तेजी से पीएम केयर्स कोष, आम आदमी पार्टी और पंजाब की शिक्षा व्यवस्था तक पहुंच गई। इससे स्पष्ट है कि स्कूलों से जुड़ा कोई भी मुद्दा अब केवल प्रशासनिक विषय न रहकर व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाता है।
पीएम केयर्स कोष के इस्तेमाल को लेकर स्पष्टता अहम
इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पक्ष पीएम केयर्स कोष के उद्देश्य और उसके संभावित उपयोग से जुड़ा है। किसी विशेष सार्वजनिक परियोजना अथवा आवश्यकता के लिए इस कोष का इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं, इसका निर्धारण उसके नियमों, स्वीकृत उद्देश्यों और संबंधित प्रशासनिक प्रावधानों के आधार पर होता है। इसलिए राजनीतिक बयानबाजी से अलग इस विषय पर वास्तविक चर्चा को कोष के आधिकारिक प्रावधानों और उपलब्ध नियमों के आधार पर देखा जाना आवश्यक है। ग्रामीण स्कूलों की मरम्मत निश्चित रूप से महत्वपूर्ण सार्वजनिक आवश्यकता है, लेकिन उसके लिए वित्तीय संसाधन का कौन-सा माध्यम उपयुक्त है, यह नीति और प्रशासन से जुड़े प्रावधानों के अनुसार तय होता है।
आगे और तीखी हो सकती है राजनीतिक बयानबाजी
भाजपा के इस पलटवार के बाद शिक्षा, सरकारी स्कूलों और पीएम केयर्स कोष को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। दिपके की मूल अपील ने ग्रामीण स्कूलों की मरम्मत जैसे जमीनी मुद्दे को सामने रखा था, लेकिन भाजपा की प्रतिक्रिया ने इसे आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक संदर्भ से जोड़ दिया। अब इस विवाद में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिपके अथवा आम आदमी पार्टी की ओर से भाजपा के आरोपों का क्या जवाब आता है। साथ ही पंजाब की शिक्षा व्यवस्था और पीएम केयर्स कोष के उपयोग को लेकर तथ्यात्मक बहस सामने आती है या मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहता है, यह भी देखने वाली बात होगी।