नई दिल्ली. भारत को दुनिया के सबसे विविध पर्यटन स्थलों वाले देशों में गिना जाता है। हिमालय से लेकर समुद्र तटों तक, प्राचीन मंदिरों से लेकर ऐतिहासिक स्मारकों तक और आध्यात्मिक केंद्रों से लेकर वन्यजीव अभयारण्यों तक यहां विदेशी यात्रियों के लिए आकर्षण की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद विदेशी पर्यटकों के आगमन में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दे रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2025 में भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में करीब 8.1% की गिरावट दर्ज की गई। यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पर्यटन केवल होटल, परिवहन और मनोरंजन तक सीमित उद्योग नहीं है, बल्कि इससे विदेशी मुद्रा आय, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के कई हिस्से जुड़े होते हैं।
भारत में पिछले वर्ष करीब 91.5 लाख विदेशी आगंतुक पहुंचे, लेकिन इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की रही जिनकी यात्रा का उद्देश्य पारंपरिक छुट्टी या पर्यटन नहीं था। कई लोग रिश्तेदारों से मिलने, कारोबारी काम या चिकित्सा संबंधी जरूरतों के लिए भारत पहुंचे। वास्तविक अवकाश पर्यटन का हिस्सा इससे काफी छोटा रहा। यही अंतर भारत की पर्यटन क्षमता और विदेशी पर्यटकों से होने वाले वास्तविक पर्यटन लाभ के बीच मौजूद चुनौती को सामने लाता है। यदि देश को वैश्विक पर्यटन बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी है तो केवल कुल विदेशी आगमन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मनोरंजन, संस्कृति, विरासत और अनुभव आधारित यात्राओं के लिए भारत को अधिक आकर्षक बनाना होगा।
वीजा प्रक्रिया अब भी बड़ी बाधा
विदेशी यात्रियों के लिए किसी देश की यात्रा तय करते समय सबसे पहली चीजों में से एक वीजा प्रक्रिया होती है। यदि आवेदन प्रक्रिया जटिल हो, दस्तावेज अधिक हों, समय अनिश्चित हो या अलग-अलग देशों के यात्रियों के लिए नियम पर्याप्त सरल न हों, तो पर्यटक दूसरे गंतव्य का विकल्प चुन सकता है। भारत ने इलेक्ट्रॉनिक वीजा जैसी सुविधाओं के जरिए प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि अभी भी कई देशों के नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी औपचारिकताएं अपेक्षाकृत जटिल हैं।
वैश्विक पर्यटन बाजार में भारत को केवल अपने पारंपरिक आकर्षण के आधार पर प्रतिस्पर्धा नहीं करनी है। यात्रियों के पास दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों में कई ऐसे विकल्प मौजूद हैं जहां यात्रा की योजना बनाना, प्रवेश अनुमति प्राप्त करना और स्थानीय परिवहन का इस्तेमाल अपेक्षाकृत सरल हो सकता है। ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि वह विदेशी पर्यटकों की यात्रा को शुरुआत से अंत तक आसान बनाए। वीजा आवेदन से लेकर हवाई अड्डे पर आगमन, होटल तक पहुंचने, स्थानीय परिवहन और पर्यटन स्थलों की जानकारी उपलब्ध कराने तक हर स्तर पर सहज अनुभव विदेशी पर्यटकों के निर्णय को प्रभावित कर सकता है।
सुरक्षा और ठगी की धारणा भी असर डालती है
विदेशी पर्यटक किसी नए देश में जाते समय केवल वहां के स्मारक या प्राकृतिक सौंदर्य नहीं देखते, बल्कि अपनी सुरक्षा और सुविधा को भी प्राथमिकता देते हैं। भारत के कई पर्यटन क्षेत्रों में विदेशी यात्रियों के साथ ठगी, अधिक कीमत वसूलने, अनधिकृत गाइड या परिवहन संबंधी शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। हर पर्यटक के साथ ऐसा अनुभव नहीं होता और भारत के अधिकांश पर्यटन क्षेत्र यात्रियों के लिए सामान्य रूप से सुरक्षित हैं, लेकिन कुछ नकारात्मक घटनाएं भी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं। इंटरनेट और सामाजिक माध्यमों के दौर में किसी यात्री का खराब अनुभव बहुत तेजी से दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकता है।
इस चुनौती का समाधान केवल सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। पर्यटन स्थलों पर प्रमाणित गाइड, स्पष्ट दर सूची, डिजिटल भुगतान, शिकायत निवारण और पर्यटकों के लिए त्वरित सहायता जैसी व्यवस्थाएं भरोसा बढ़ा सकती हैं। खासकर पहली बार भारत आने वाले यात्रियों के लिए पारदर्शिता बहुत महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी विदेशी यात्री को टैक्सी, होटल, स्थानीय बाजार या पर्यटन स्थल पर कीमत और सेवा को लेकर अनिश्चितता महसूस होती है, तो वह अपने अनुभव को नकारात्मक रूप में देख सकता है। इसलिए पर्यटन की गुणवत्ता सुधारना विदेशी आगमन बढ़ाने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
परिवहन और पर्यटन ढांचे की चुनौती
भारत में बड़े शहरों और प्रमुख पर्यटन केंद्रों के बीच हवाई संपर्क काफी बेहतर हुआ है, लेकिन देश के अनेक आकर्षक पर्यटन स्थलों तक पहुंचना अब भी विदेशी यात्रियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कई ऐतिहासिक, प्राकृतिक और ग्रामीण पर्यटन स्थल ऐसे हैं जहां अंतिम चरण की यात्रा के लिए सड़क या स्थानीय परिवहन पर निर्भर रहना पड़ता है। यदि रास्ते लंबे हों, सार्वजनिक परिवहन सीमित हो और स्थानीय परिवहन के बारे में भरोसेमंद जानकारी आसानी से उपलब्ध न हो तो विदेशी पर्यटक अधिक सुविधाजनक गंतव्य को प्राथमिकता दे सकता है।
पर्यटन ढांचे की गुणवत्ता का अर्थ केवल बड़ी सड़कें और हवाई अड्डे बनाना नहीं है। स्वच्छ सार्वजनिक सुविधाएं, स्पष्ट संकेतक, बहुभाषी सूचना, सुरक्षित पैदल मार्ग, विश्वसनीय परिवहन, बेहतर शौचालय और डिजिटल जानकारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। भारत के कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों ने बुनियादी ढांचे में सुधार किया है, लेकिन देश के विशाल पर्यटन मानचित्र में अभी भी अनेक ऐसे क्षेत्र हैं जहां सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन अनुभव के बीच अंतर दिखाई देता है। यदि भारत को विदेशी पर्यटकों के लिए लंबे समय तक आकर्षक बनाए रखना है तो इन छोटे लेकिन निर्णायक अनुभवों पर अधिक ध्यान देना होगा।
विदेशी पर्यटकों से होने वाली आय का सवाल
विदेशी पर्यटकों की संख्या में गिरावट का प्रभाव केवल होटल और पर्यटन स्थलों की भीड़ पर नहीं पड़ता, बल्कि विदेशी मुद्रा अर्जित करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है। नीति आयोग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार भारत में विदेशी पर्यटकों से होने वाली आय करीब 35 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। लेकिन भारत की तुलना कई दूसरे पर्यटन केंद्रों से करने पर प्रति विदेशी पर्यटक खर्च और पर्यटन से मिलने वाले आर्थिक लाभ को लेकर अभी भी काफी संभावनाएं दिखाई देती हैं। केवल अधिक पर्यटक लाना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे पर्यटकों को आकर्षित करना भी जरूरी है जो भारत में अधिक समय बिताएं और स्थानीय अर्थव्यवस्था में अधिक खर्च करें।
यही वजह है कि अनुभव आधारित पर्यटन भारत के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। विरासत पर्यटन, आध्यात्मिक यात्रा, आयुर्वेद और स्वास्थ्य पर्यटन, वन्यजीव, साहसिक पर्यटन, ग्रामीण जीवन, भोजन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए बेहतर ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है। यदि विदेशी पर्यटक एक शहर में केवल 2 दिन बिताने के बजाय कई क्षेत्रों की यात्रा करे और स्थानीय सेवाओं का इस्तेमाल करे तो पर्यटन से होने वाली आय कई गुना बढ़ सकती है। इसके लिए भारत को केवल पर्यटन स्थलों का प्रचार करने के बजाय पूरी यात्रा को एक अनुभव के रूप में प्रस्तुत करना होगा।
घरेलू पर्यटन ने संभाला मोर्चा
विदेशी पर्यटकों की चुनौती के बीच भारत के घरेलू पर्यटन क्षेत्र में मजबूत वृद्धि दिखाई दे रही है। उपलब्ध आंकड़ों में घरेलू पर्यटन में करीब 46% की तेजी का उल्लेख किया गया है और धार्मिक पर्यटन इस वृद्धि का एक बड़ा आधार बनकर उभरा है। देश के भीतर धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इससे होटल, परिवहन, स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और छोटे कारोबारों को भी लाभ मिल रहा है। भारत के लिए यह घरेलू पर्यटन अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
हालांकि घरेलू पर्यटन की मजबूती विदेशी पर्यटन की कमी का पूरी तरह विकल्प नहीं बन सकती। विदेशी पर्यटक आमतौर पर देश में विदेशी मुद्रा लेकर आते हैं और उनके खर्च का एक बड़ा हिस्सा होटल, स्थानीय परिवहन, खरीदारी, मनोरंजन तथा अन्य पर्यटन सेवाओं में जाता है। इसलिए भारत के लिए रणनीति यह होनी चाहिए कि घरेलू पर्यटन की गति को बनाए रखते हुए विदेशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण और सुविधा को बढ़ाया जाए। दोनों बाजारों की जरूरतें अलग हैं और दोनों को समान तरीके से विकसित करने के बजाय उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार नीतियां बनाना अधिक प्रभावी होगा।
वैश्विक परिस्थितियों का भी पड़ रहा असर
भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या को केवल घरेलू समस्याओं के आधार पर समझना पूरी तस्वीर नहीं होगी। वैश्विक स्तर पर युद्ध, क्षेत्रीय तनाव, आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की लागत ने भी लोगों की यात्रा योजनाओं को प्रभावित किया है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से विमानन मार्गों, ईंधन लागत और यात्रियों की सुरक्षा संबंधी धारणाओं पर असर पड़ सकता है। यूरोप और उत्तरी अमेरिका के यात्रियों के लिए लंबी दूरी की यात्रा की लागत बढ़ने पर भारत जैसे दूरस्थ गंतव्य के बजाय नजदीकी पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता देने की संभावना भी बढ़ सकती है।
भारत से विदेश जाने वाले यात्रियों के व्यवहार में बदलाव भी घरेलू पर्यटन की तस्वीर को प्रभावित कर रहा है। विदेशी मुद्रा खर्च को लेकर सरकार की अपील और वैश्विक परिस्थितियों के कारण कुछ भारतीय यात्रियों ने विदेश यात्रा की योजनाओं पर पुनर्विचार किया है। हालांकि इसका सीधा संबंध विदेशी पर्यटकों के भारत आगमन से जोड़ना उचित नहीं होगा। विदेशी आगमन पर उनके अपने देशों की आर्थिक स्थिति, भारत से हवाई संपर्क, वीजा नियम, यात्रा लागत और भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि जैसे कई कारक एक साथ असर डालते हैं।
भारत के लिए अब अगली बड़ी चुनौती क्या है?
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पर्यटन संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि उनकी वैश्विक क्षमता के अनुरूप प्रस्तुति और प्रबंधन की है। देश के पास ऐसी विरासत और प्राकृतिक विविधता है जिसकी बराबरी दुनिया के बहुत कम देशों से की जा सकती है। लेकिन किसी विदेशी यात्री के लिए केवल आकर्षक स्मारक या सुंदर पहाड़ पर्याप्त नहीं होते। उसे आसान वीजा, भरोसेमंद परिवहन, सुरक्षित वातावरण, साफ-सफाई, पारदर्शी कीमत, अच्छी डिजिटल जानकारी और यादगार अनुभव चाहिए। इन सभी मोर्चों पर लगातार सुधार भारत की पर्यटन प्रतिस्पर्धा को मजबूत कर सकता है।
आने वाले वर्षों में भारत को अपनी पर्यटन नीति में संख्या के साथ गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा। कितने विदेशी पर्यटक आए, यह महत्वपूर्ण है, लेकिन वे कितने दिन रुके, कितना खर्च किया, कितने राज्यों की यात्रा की और अपने अनुभव के बारे में क्या बताया, ये संकेतक भी उतने ही अहम हैं। यदि भारत विदेशी पर्यटकों के लिए यात्रा को सरल, सुरक्षित और यादगार बना सके तो इसकी विशाल सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा वैश्विक पर्यटन बाजार में कहीं अधिक बड़ा आर्थिक लाभ दे सकती है। विदेशी आगमन में मौजूदा गिरावट को इसलिए केवल चिंता के रूप में देखने के बजाय पर्यटन व्यवस्था की कमजोरियों को दूर करने और भारत को अगले स्तर का वैश्विक पर्यटन गंतव्य बनाने के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है।