नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों के पासपोर्ट और वीजा संबंधी नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। गृह मंत्रालय की ओर से जारी आव्रजन एवं विदेशी नागरिक (छूट) (संशोधन) आदेश, 2026 के तहत कुछ विशेष श्रेणियों के विदेशी नागरिकों को मौजूदा प्रावधानों में राहत दी गई है। इस संशोधन का उद्देश्य उन लोगों की परिस्थितियों को ध्यान में रखना है, जिन्हें विभिन्न कारणों से अपने मूल देश के यात्रा दस्तावेजों का नवीनीकरण कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। नए आदेश में कुछ पाकिस्तानी नागरिकों, धार्मिक उत्पीड़न से प्रभावित अल्पसंख्यक समुदायों और अन्य विशेष श्रेणियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा भारत के पड़ोसी देशों नेपाल और भूटान के नागरिकों की आवाजाही से जुड़े पहचान एवं यात्रा संबंधी प्रावधानों को भी सुव्यवस्थित करने की बात कही गई है। यह संशोधन भारत की आव्रजन व्यवस्था में विशेष परिस्थितियों के अनुरूप नियमों को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
2009 तक भारत आए कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को पासपोर्ट नवीनीकरण से छूट
संशोधित आदेश के तहत ऐसे पाकिस्तानी नागरिकों को विशेष राहत दी गई है, जिन्होंने स्थायी रूप से भारत में रहने के उद्देश्य से 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले देश में प्रवेश किया था। यदि ऐसे नागरिकों के पास पाकिस्तान का कंप्यूटरीकृत राष्ट्रीय पहचान पत्र यानी CNIC उपलब्ध नहीं है और इसी कारण वे अपने यात्रा दस्तावेजों का नवीनीकरण नहीं करा पा रहे हैं, तो उन्हें सामान्य पासपोर्ट नवीनीकरण संबंधी अनिवार्यता से छूट दी जा सकती है। यह प्रावधान उन लोगों की व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो लंबे समय से भारत में रह रहे हैं और जिनके लिए मूल देश से आवश्यक दस्तावेज हासिल करना संभव नहीं हो पा रहा है। हालांकि, यह राहत सभी पाकिस्तानी नागरिकों पर लागू नहीं होगी, बल्कि निर्धारित शर्तों और पात्रता के आधार पर ही इसका लाभ मिल सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य विशेष परिस्थितियों में रह रहे लोगों के दस्तावेजी संकट को कम करना है।
पाकिस्तानी नागरिकों के लिए निर्धारित की गई हैं कई अनिवार्य शर्तें
पासपोर्ट नवीनीकरण से छूट प्राप्त करने के लिए संबंधित पाकिस्तानी नागरिकों को कई शर्तें पूरी करनी होंगी। आदेश के अनुसार, ऐसे व्यक्ति ने पाकिस्तान में रहते हुए विवाह नहीं किया होना चाहिए और वहां कोई अचल संपत्ति भी अर्जित नहीं की होनी चाहिए। इसके अलावा भारत आने से पहले पाकिस्तान जाते समय उसके परिवार के सदस्य भारतीय नागरिक होने चाहिए और उसे भविष्य में पाकिस्तान नहीं लौटने की प्रतिबद्धता भी देनी होगी। संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध पुलिस अथवा सुरक्षा एजेंसियों की कोई प्रतिकूल रिपोर्ट भी नहीं होनी चाहिए। इन शर्तों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राहत का लाभ केवल निर्धारित परिस्थितियों में आने वाले पात्र लोगों को ही मिले। इससे आव्रजन और सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है। स्पष्ट है कि दस्तावेजी छूट के साथ सुरक्षा जांच और पात्रता की शर्तों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों को भी राहत
संशोधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित है। आदेश के अनुसार, इन तीनों देशों के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के ऐसे सदस्य, जिन्होंने धार्मिक उत्पीड़न या उसके भय के कारण शरण लेने के लिए 31 दिसंबर 2024 या उससे पहले भारत में प्रवेश किया था, उन्हें भी निर्धारित नियमों के तहत छूट प्रदान की गई है। इस प्रावधान का आधार धार्मिक उत्पीड़न के कारण अपना मूल निवास छोड़ने को विवश हुए लोगों की परिस्थितियों को माना गया है। लंबे समय से भारत में रह रहे ऐसे समुदायों के लोगों के लिए पासपोर्ट और वीजा संबंधी औपचारिकताएं कई बार बड़ी व्यावहारिक चुनौती बन जाती हैं। नए संशोधन के माध्यम से उनकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए विशेष छूट का प्रावधान किया गया है। हालांकि, इसका लाभ संबंधित आदेश में निर्धारित प्रवेश की तारीख, समुदाय और अन्य पात्रता शर्तों के अधीन होगा।
श्रीलंकाई तमिलों और तिब्बतियों का भी संशोधन में उल्लेख
नए आदेश में श्रीलंकाई तमिलों और तिब्बतियों का भी उल्लेख किया गया है। इन समुदायों के कुछ वर्ग लंबे समय से भारत में रह रहे हैं और उनकी परिस्थितियां सामान्य विदेशी नागरिकों से अलग रही हैं। ऐसे लोगों के लिए पहचान, यात्रा दस्तावेज और आव्रजन संबंधी औपचारिकताओं का निर्धारण कई बार विशेष प्रशासनिक व्यवस्था की मांग करता है। संशोधित आदेश में इन श्रेणियों को शामिल किए जाने से यह संकेत मिलता है कि सरकार विभिन्न ऐतिहासिक और मानवीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आव्रजन नियमों को व्यवस्थित करना चाहती है। हालांकि, उपलब्ध प्रावधानों में इनके लिए लागू होने वाली सभी विशिष्ट शर्तों का विस्तृत विवरण सामने आना आवश्यक है। इसलिए संबंधित श्रेणियों को मिलने वाली वास्तविक राहत का दायरा अधिसूचना के पूर्ण प्रावधानों और उनके क्रियान्वयन के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
भारत, नेपाल और भूटान के नागरिकों की आवाजाही होगी अधिक व्यवस्थित
संशोधन का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू भारत, नेपाल और भूटान के नागरिकों के बीच यात्रा एवं पहचान संबंधी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना है। इन तीनों पड़ोसी देशों के बीच लंबे समय से लोगों की आवाजाही, पारिवारिक संबंधों, व्यापार और सामाजिक संपर्कों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। ऐसे में सीमा पार यात्रा के दौरान पहचान और दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रियाओं को स्पष्ट एवं सुविधाजनक बनाना आवश्यक माना जाता है। नए संशोधन में इन देशों के नागरिकों की आवाजाही से जुड़े प्रोटोकॉल को अधिक व्यवस्थित करने का प्रावधान किया गया है। इससे सीमा क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों, यात्रियों और अन्य संबंधित लोगों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुविधा मिलने की संभावना है। हालांकि, इस बदलाव का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि संशोधित पहचान एवं यात्रा नियमों को संबंधित एजेंसियां किस प्रकार लागू करती हैं। कुल मिलाकर, 2026 का यह संशोधन विशेष परिस्थितियों में रह रहे विदेशी नागरिकों को राहत देने और पड़ोसी देशों के साथ यात्रा संबंधी व्यवस्थाओं को स्पष्ट बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है।