कोलकाता: पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ हुई प्रशासनिक बैठक में अपनी उपस्थिति को लेकर छिड़े विवाद पर चुप्पी तोड़ी है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा उठाए गए 'बीजेपी-चुनाव आयोग सांठगांठ' के आरोपों को उन्होंने पूरी तरह आधारहीन बताया और इसके पीछे के कानूनी कारण स्पष्ट किए।
TMC ने उठाए थे सवाल
सोमवार को नवान्न (सचिवालय) में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सभी विभागों के सचिवों के साथ एक अहम बैठक की थी। इस बैठक में मनोज अग्रवाल की उपस्थिति पर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने सोशल मीडिया के जरिए सवाल उठाए थे। टीएमसी का तर्क था कि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पद पर रहते हुए वे मुख्यमंत्री की प्रशासनिक बैठक में कैसे शामिल हो सकते हैं?
मनोज अग्रवाल का 'कानूनी' जवाब
मंगलवार को मुख्य सचिव का पदभार संभालने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मनोज अग्रवाल ने तीन प्रमुख बिंदु रखे:
1. सचिवालय का हिस्सा: उन्होंने बताया कि सीईओ (CEO) अभी भी राज्य चुनाव विभाग के सचिव का पद संभाल रहे हैं, और मुख्यमंत्री ने सभी विभागों के सचिवों की बैठक बुलाई थी।
2. सीनियर कैडर ऑफिसर: वे इस समय पश्चिम बंगाल कैडर के सबसे वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी हैं।
3. IAS एसोसिएशन के अध्यक्ष: वे वर्तमान में राज्य आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं।
"नियमों के तहत ही बैठक में था"
मनोज अग्रवाल ने स्पष्ट किया, "कल मुख्यमंत्री की पहली बैठक सभी वरिष्ठ सचिवों के साथ थी। राज्य के चुनाव विभाग के सचिव के रूप में मेरा वहां होना कानूनन सही था।"उन्होंने यह भी साफ किया कि जिलाधिकारियों (DM) के साथ हुई दूसरी बैठक से पहले मुख्य सचिव के रूप में उनकी फाइल पर हस्ताक्षर हो चुके थे। हालांकि नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना शाम को जारी हुई, लेकिन प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी। उन्होंने कहा, "बिना आधिकारिक नियुक्ति के मैं जिलाधिकारियों की बैठक में नहीं जाता, क्योंकि वहां सीईओ के तौर पर मेरी कोई भूमिका नहीं थी।"
इस स्पष्टीकरण के साथ ही नए मुख्य सचिव ने यह संकेत दे दिया है कि वे नियमों और प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अपनी नई जिम्मेदारी को पूरी पारदर्शिता के साथ निभाने के लिए तैयार हैं।