नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत मंडपम में सरकार के इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने मौजूद शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के नेताओं, स्टार्टअप संस्थापकों और युवाओं से अपील की कि वे विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में अपने लिए मापने योग्य लक्ष्य तय करें। उन्होंने कहा कि अगले तीन वर्षों में तय करें कि कौन सी तकनीक, कौन सा प्रोटोटाइप, कौन सा पायलट प्रोजेक्ट या कौन सा उत्पाद विकसित करेंगे। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में मदद करने वाले नवाचारों को आगे बढ़ाएं।
मापने योग्य परिणामों पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह आयोजन सिर्फ विचारों के आदान-प्रदान का मंच नहीं रहेगा बल्कि मापने योग्य परिणामों का प्लेटफॉर्म बनेगा। वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों को ठोस लक्ष्य तय कर काम करना चाहिए। तकनीक विकास को चर्चा से आगे बढ़ाकर वास्तविक उत्पादों और समाधानों तक ले जाना जरूरी है। विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए विज्ञान और नवाचार की भूमिका अहम है। युवाओं और स्टार्टअप्स को इस दिशा में आगे आने का आह्वान किया गया।
भारत और दुनिया के लिए तकनीक
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि आज का लक्ष्य भारत और दुनिया दोनों के लिए नई तकनीकें विकसित करना है। घरेलू जरूरतों के साथ वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने वाले नवाचारों पर ध्यान देना होगा। आत्मनिर्भरता और वैश्विक योगदान दोनों को साथ लेकर चलना चाहिए। विज्ञान सम्मेलन को इस सोच के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। शोध और उद्योग के बीच साझेदारी बढ़ाकर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। नवाचार को जनहित से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
एआई समिट और स्वदेशी मॉडल का जिक्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने इस साल अपना पहला एआई इंपैक्ट समिट भी आयोजित किया और अपना खुद का मॉडल लॉन्च किया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत की प्रगति को रेखांकित किया गया। स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करना आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है। तकनीक के क्षेत्र में भारत अब सिर्फ उपयोगकर्ता नहीं बल्कि निर्माता बन रहा है। इन उपलब्धियों को और आगे बढ़ाने की जरूरत बताई गई। युवाओं को एआई और उभरती तकनीकों में अवसर तलाशने को कहा गया।
विकसित भारत के लिए तीन वर्षीय लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने शोधकर्ताओं और उद्यमियों से आग्रह किया कि वे अगले तीन वर्षों के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करें। कौन सी नई तकनीक विकसित करेंगे, कौन सा प्रोटोटाइप तैयार करेंगे या कौन सा उत्पाद बाजार में लाएंगे, यह पहले से तय हो। मापने योग्य लक्ष्यों से प्रगति का आकलन आसान होगा। नवाचार को सिर्फ प्रयोगशाला तक सीमित न रखकर वास्तविक जीवन में बदलाव लाने वाला बनाना होगा। विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब विज्ञान और तकनीक ठोस परिणाम दें।
नवाचार को परिणाममुखी बनाने का संदेश
सम्मेलन को चर्चा का मंच बनाने के बजाय परिणामों का मंच बनाने पर प्रधानमंत्री ने जोर दिया। विचारों से आगे बढ़कर प्रोटोटाइप, पायलट प्रोजेक्ट और उत्पाद तक पहुंचना जरूरी है। उद्योग, स्टार्टअप और शोध संस्थानों को मिलकर काम करना चाहिए। युवाओं में नवाचार की भावना को प्रोत्साहित करना विकसित भारत के लिए आवश्यक है। प्रधानमंत्री के आह्वान से विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। देश अब नवाचार के बल पर आगे बढ़ने की दिशा में है।