चंडीगढ़ - कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भाजपा की प्रस्तावित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा पर सवाल उठाते हुए इसे विडंबनापूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आमतौर पर विपक्ष सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में विपक्ष मतदान के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठा रहा है, जबकि सत्ताधारी दल रैली निकाल रहा है। तिवारी ने मांग की कि जिन लोगों के मतदान अधिकार कथित तौर पर प्रभावित हुए हैं, उनके अधिकार बहाल किए जाने चाहिए।
भाजपा की पदयात्रा पर कांग्रेस का सवाल
मनीष तिवारी ने कहा कि संविधान की रक्षा की बात करने वालों को सबसे पहले नागरिकों के मतदान अधिकार सुनिश्चित करने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि करीब 13 करोड़ लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित रखा गया है और इन अधिकारों की बहाली को संविधान की रक्षा से जोड़ा। तिवारी की यह टिप्पणी भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान के संदर्भ में आई है। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत दिल्ली के चांदनी चौक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में पदयात्रा निकाले जाने की बात कही गई थी।
SIR और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक टकराव
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा अपने जनसंपर्क अभियान के जरिए विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की कोशिश कर रही है।
इसी बीच, विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ब्लॉक की ओर से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली आयोजित करने की घोषणा का भी जिक्र किया गया। इस रैली का उद्देश्य मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाना बताया गया है। हालांकि, मतदान अधिकारों से वंचित किए जाने के दावे और एसआईआर में अनियमितताओं के आरोपों का आकलन संबंधित आधिकारिक आंकड़ों तथा चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के आधार पर किया जाना चाहिए।
पंजाब में नार्को-टेररिज्म पर जताई चिंता
मनीष तिवारी ने पंजाब की कानून-व्यवस्था और नशीले पदार्थों से जुड़ी चुनौतियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य लंबे समय से नार्को-टेररिज्म की समस्या का सामना कर रहा है। तिवारी के मुताबिक, पंजाब ने 1980 से 1995 के बीच आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि अब आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखने के लिए राज्य को नशीले पदार्थों से जुड़े आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर काम करना होगा। उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब पंजाब में नशे की समस्या और उससे निपटने के उपायों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
अबोहर में नशा-विरोधी मैराथन की अनुमति नहीं
इस बीच, पंजाब सरकार ने अबोहर में जाखड़ ट्रस्ट की ओर से आयोजित की जाने वाली सातवीं वार्षिक नशा-विरोधी मैराथन को अनुमति देने से इनकार कर दिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार ने इसके पीछे राज्य की मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला दिया।
भाजपा नेता सुनील जाखड़ के परिवार से जुड़े इस ट्रस्ट की ओर से पिछले सात वर्षों से 'नशों से दूर, खेलों की ओर' के संदेश के साथ यह आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रहने और खेलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। मैराथन की अनुमति नहीं मिलने का मामला पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान और कानून-व्यवस्था को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आया है।
एक ओर मतदाता सूची के एसआईआर को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, तो दूसरी ओर पंजाब में नशे की समस्या और उससे निपटने के तरीकों पर राजनीतिक चर्चा तेज है।