हरिद्वार - योग गुरु बाबा रामदेव ने सनातन धर्म, हिंदू देवी-देवताओं और प्राचीन धार्मिक ग्रंथों को लेकर की जा रही कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताई है। बुधवार को हरिद्वार के कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम, माता सीता, भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव से जुड़े विवादित दावों पर विरोध दर्ज कराया। रामदेव ने कहा कि सनातन धर्म की परंपराओं और धर्मग्रंथों को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम का जवाब तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर दिया जाएगा।
राम, सीता, कृष्ण और शिव पर टिप्पणियों का किया विरोध
बाबा रामदेव ने आरोप लगाया कि कुछ लोग धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के संदर्भों में बदलाव करके हिंदू देवी-देवताओं की छवि को प्रभावित करने वाली बातें प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने भगवान श्रीराम और माता सीता को मांसाहार एवं मदिरापान से जोड़ने, भगवान श्रीकृष्ण के महारास की गलत व्याख्या करने और भगवान शिव को नशे से जोड़कर प्रस्तुत करने जैसी बातों पर आपत्ति जताई।
रामदेव ने कहा कि धार्मिक आस्थाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा करते समय मूल ग्रंथों, ऐतिहासिक संदर्भों और प्रमाणों को ध्यान में रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, मनमाने ढंग से धार्मिक प्रसंगों की व्याख्या करने से समाज में भ्रम पैदा हो सकता है। उन्होंने भगवान ब्रह्मा से जुड़े कुछ आरोपों का भी उल्लेख किया और दावा किया कि कुछ लेखन तथा व्याख्याओं के जरिए सनातन परंपराओं को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों और संबंधित ग्रंथों की व्याख्याओं की स्वतंत्र रूप से जांच किया जाना आवश्यक है।
भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के अधिवेशन में होगी चर्चा
बाबा रामदेव ने बताया कि पतंजलि की ओर से आयोजित भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन में इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय अधिवेशन के माध्यम से प्राचीन भारतीय ज्ञान, धर्मशास्त्रों और सनातन परंपराओं से जुड़े विभिन्न दावों की पड़ताल की जाएगी। रामदेव के अनुसार, इस तरह के विमर्श में धार्मिक ग्रंथों के वास्तविक संदर्भों को सामने रखना और प्रमाणों के आधार पर विषयों को समझना महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म से जुड़े मुद्दों पर तथ्यों के साथ जवाब दिया जाएगा।
आर्यों के भारत आने के सिद्धांत पर भी उठाए सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान बाबा रामदेव ने आर्यों के आगमन से जुड़े ऐतिहासिक विमर्श पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने आर्यों के बाहर से भारत आने के सिद्धांत को खारिज करते हुए कहा कि भारत से दूसरे क्षेत्रों में लोगों के जाने और ज्ञान के प्रसार की परंपरा रही है।
रामदेव ने प्रवासन के अलग-अलग कारणों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग ज्ञान का प्रसार करने, रोजगार की तलाश में या व्यापार के उद्देश्य से दूसरे देशों में जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आर्यों के मूल और भारत के मूल निवासियों से संबंधित कुछ अवधारणाओं का इस्तेमाल समाज को बांटने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने ब्राह्मणों को निशाना बनाने वाले नारों और कथित विभाजनकारी विमर्श पर भी आपत्ति जताई। हालांकि, आर्यों की उत्पत्ति और प्राचीन भारतीय आबादी के इतिहास को लेकर उनके दावों को ऐतिहासिक, भाषाई और आनुवंशिक शोध के संदर्भ में अलग से देखना जरूरी है।
राम को अमीरों और शिव को गरीबों का भगवान बताने पर जताई नाराजगी
बाबा रामदेव ने उस कथित बयान पर भी आपत्ति जताई, जिसमें भगवान श्रीराम को अमीरों और भगवान शिव को गरीबों का भगवान बताने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं को अमीर और गरीब के आधार पर बांटना उचित नहीं है।
रामदेव ने यह भी कहा कि एक ओर कुछ लोग देवी-देवताओं के ऐतिहासिक अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हीं के बारे में आपत्तिजनक आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने इसे सनातन धर्म के खिलाफ चलाए जा रहे कथित अभियान का हिस्सा बताया।
सनातन धर्म पर सुनियोजित हमले का आरोप
रामदेव ने दावा किया कि सनातन धर्म की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ लोग धार्मिक ग्रंथों और प्रसंगों की मनमानी व्याख्या कर रहे हैं। उन्होंने मुगल और ब्रिटिश काल का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि ऐतिहासिक दौर में कुछ लोगों ने धर्मग्रंथों में ऐसी बातें जोड़ीं, जिनसे सनातन परंपराओं की छवि प्रभावित हुई।
उन्होंने सनातन धर्म के अनुयायियों की संख्या और भारतीय समाज की ऐतिहासिक जड़ों का भी जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने भारत और व्यापक भारतीय उपमहाद्वीप की आबादी, धार्मिक पहचान और पूर्वजों से संबंधित कई दावे किए। हालांकि, आबादी, वंशावली और धार्मिक पहचान से जुड़े इन आंकड़ों तथा ऐतिहासिक दावों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र और विश्वसनीय स्रोतों की आवश्यकता है।
बाबा रामदेव ने धार्मिक ग्रंथों और हिंदू देवी-देवताओं से जुड़े विवादित बयानों पर आपत्ति जताते हुए तथ्यात्मक जवाब देने की बात कही है। भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन में इन विषयों पर चर्चा किए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी। उनके बयानों में शामिल ऐतिहासिक और जनसंख्या संबंधी दावों को प्रकाशित करने से पहले संबंधित स्रोतों से सत्यापित करना उचित होगा।