बर्मिंघम | दुर्गापूजा के ढाक की गूंज भले ही शांत हो गई हो और मां दुर्गा की विदाई की यादें अभी भी लोगों के मन में बसी हों, लेकिन ब्रिटेन में भारतीय समुदाय के लिए त्योहारों का सिलसिला जारी है। दुर्गापूजा के बाद अब बर्मिंघम दिवाली के स्वागत के लिए तैयार है। ‘Diwali Gala 2026 – Festival of Lights’ का आयोजन 31 अक्टूबर को वेस्ट ब्रोमविच स्थित द कॉन्फ्रेंस सुइट में किया जाएगा। इस अवसर पर भारतीय प्रवासी समुदाय के लोग एकजुट होकर संस्कृति, परंपरा और सामुदायिक एकता का उत्सव मनाएंगे। यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि विदेश में रहते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने और अपनेपन का एहसास बनाए रखने का एक माध्यम भी है। ‘चलो, लेट्स गो!’ के उत्साहपूर्ण संदेश के साथ आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम भारत के अलग-अलग राज्यों और भाषाई पृष्ठभूमियों से आने वाले लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। उम्मीद है कि विभिन्न समुदायों के भारतीय परिवार इस शाम का हिस्सा बनेंगे और क्षेत्रीय विविधताओं से ऊपर उठकर दिवाली की साझा खुशियां मनाएंगे।
पिछले साल करीब 150 लोगों ने लिया था हिस्सा
आयोजकों के अनुसार, पिछले वर्ष इस कार्यक्रम में लगभग 150 लोगों ने हिस्सा लिया था। इस बार भी एक जीवंत और उत्साहपूर्ण आयोजन की उम्मीद है। कार्यक्रम में प्रायोजकों और विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी इसकी शोभा बढ़ाएगी। इस शाम का प्रमुख आकर्षण लंदन के गायक चिराग राव की संगीत प्रस्तुति होगी। इसके अलावा, भारतीय प्रवासी समुदाय के कलाकार संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय त्योहारों की जीवंत छटा बिखेरेंगे। कार्यक्रम में भारतीय वाणिज्य दूतावास, बर्मिंघम के हेड ऑफ चांसरी राकेश तिवारी और वेस्ट मिडलैंड्स के डिप्टी लॉर्ड-लेफ्टिनेंट डेरिक एंडरसन CBE के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजकों का कहना है कि इन विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी क्षेत्र के बहुसांस्कृतिक समाज में दिवाली जैसे भारतीय त्योहारों के महत्व को रेखांकित करेगी।
शाकाहारी बुफे, डीजे और डांस होंगे आकर्षण
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ कार्यक्रम में शाकाहारी बुफे, डीजे और डांस की भी व्यवस्था होगी। मेहंदी कॉर्नर और फोटो खिंचवाने के विशेष अवसर उत्सव में और रंग भरेंगे। बच्चों के लिए अलग से ‘किड्स फन ज़ोन’ बनाया जाएगा, जबकि रैफल ड्रॉ के जरिए भी लोगों को भागीदारी का अवसर मिलेगा। इस पहल का नेतृत्व संस्थापक और निदेशक राकेश चौहान कर रहे हैं। वहीं, अरिंदम अधिकारी आयोजन की योजना, समन्वय और अतिथियों के साथ संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
प्रवासी भारतीयों के लिए संस्कृति से जुड़ने का अवसर
ब्रिटेन में रहने वाले अनेक भारतीयों के लिए दिवाली जैसे त्योहारों का महत्व मनोरंजन से कहीं अधिक है। ये पर्व उन्हें अपने घर, बचपन की यादों, पारिवारिक मेल-मिलाप, पारंपरिक पकवानों और रोशनी से सजे घरों की याद दिलाते हैं। ब्रिटेन को अपना घर बना चुके भारतीय परिवारों के लिए ऐसे सामुदायिक आयोजन बच्चों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। भारत से दूर पले-बढ़े बच्चों के लिए ये उत्सव अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और उससे जुड़ने का अवसर देते हैं। ऐसे आयोजन परिवारों और दोस्तों को एक साथ लाने के साथ-साथ परंपराओं को साझा करने, पुरानी यादों को जीवित रखने और उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद करते हैं।
दिवाली की रोशनी में झलकेगा भारत से जुड़ाव
दिवाली पारंपरिक रूप से अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है। प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए इन रोशनियों का एक खास अर्थ भी है—अपनापन, स्मृतियां और अपनी मातृभूमि से अटूट जुड़ाव। दुर्गापूजा के तुरंत बाद आयोजित होने वाला बर्मिंघम का यह दिवाली समारोह ब्रिटेन में भारतीय त्योहारों की समृद्ध परंपरा और सांस्कृतिक विविधता को उजागर करेगा। ढाक की गूंज की जगह अब दीयों की रोशनी ले रही है, लेकिन समुदाय के बीच एकता और अपनेपन की भावना कायम है।
जैसे-जैसे बर्मिंघम ‘Diwali Gala 2026’ के स्वागत की तैयारी कर रहा है, यह आयोजन प्रवासी जीवन की एक व्यापक तस्वीर पेश करता है। यह बताता है कि देश की सीमाएं पार करने से परंपराएं समाप्त नहीं होतीं। वे लोगों के साथ नए देशों तक पहुंचती हैं, वहां के माहौल के अनुरूप नए रूप अपनाती हैं और अपनी जड़ों से जुड़ी यादों को संजोए रखती हैं। भारत से हजारों मील दूर बर्मिंघम में दिवाली के दीप एक बार फिर जगमगाएंगे। उनकी रोशनी न केवल उत्सव की शाम को रोशन करेगी, बल्कि भारतीय समुदाय, उसकी संस्कृति और अपने वतन के बीच के अटूट रिश्ते को भी उजागर करेगी।