कोलकाता: सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) समेत देश के विभिन्न प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में आरएसएस, भाजपा और एबीवीपी के कथित हमलों के खिलाफ तथा आईआईटी बॉम्बे में दलित छात्र की कथित 'संस्थागत हत्या' (Institutional Murder) की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर वामपंथी छात्र संगठन एसएफआई (Students' Federation of India) ने कोलकाता की सड़कों पर मोर्चा खोल दिया। कोलकाता की ऐतिहासिक प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर छात्रों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन और रैली का आयोजन किया।
शिक्षण संस्थानों के माहौल को बिगाड़ने का आरोप
हाथों में एसएफआई के झंडे और बड़े बैनर थामे छात्रों ने मुख्य द्वार पर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों के मुख्य बैनर पर स्पष्ट रूप से लिखा था— 'SRFTI সহ গোটা দেশে বিভিন্ন শিক্ষাপ্রতিষ্ঠানের ওপর RSS-BJP-ABVP-র আক্রমণকে ধিক্কার' (एसआरएफटीआई समेत देशभर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों पर आरएसएस-भाजपा-एबीवीपी के हमलों का धिक्कार) और 'IIT Bombay-তে ছাত্রের প্রাतिষ্ঠানিক হত্যার দ্রুত নিরপেক্ষ বিচার করতে হবে' (आईआईटी बॉम्बे में छात्र की संस्थागत हत्या का त्वरित और निष्पक्ष न्याय हो)। प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार और दक्षिणपंथी छात्र संगठन देश के प्रमुख कला, विज्ञान और फिल्म संस्थानों में स्वतंत्र सोच और लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। एसआरएफटीआई से लेकर देश के अन्य परिसरों तक में असहमति की आवाजों को दबाया जा रहा है और भय का वातावरण बनाया जा रहा है।
जातिवाद और मनुवाद के खिलाफ गूंजे 'बिरसा-फुले-आंबेडकर' के नारे
रैली के दौरान छात्रों ने जातिगत भेदभाव और मनुवादी मानसिकता के खिलाफ तीखे नारे लगाए। परिसर के बाहर गूंजे नारों में प्रमुख रहे— "मोदेर जातपातेर छाती फाट, बिरसा-फुले-आंबेडकर", "ब्राह्मणवादेर छाती फाट, बिरसा-फुले-आंबेडकर" और "जय भीम आंबेडकर"। छात्रों ने आईआईटी बॉम्बे में छात्र की मौत का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि देश के तकनीकी और उच्च शिक्षण संस्थानों में हाशिए पर खड़े और दलित-आदिवासी पृष्ठभूमि के छात्रों को जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। एसएफआई ने इस मामले में तुरंत उच्चस्तरीय और निष्पक्ष न्यायिक जांच कराकर जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।
प्रेसीडेंसी से कॉलेज स्ट्रीट तक न्याय की आवाज
प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के परिसर से शुरू हुआ यह मार्च ऐतिहासिक गेट को पार करते हुए कॉलेज स्ट्रीट की मुख्य सड़क तक पहुंचा। रैली में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। छात्र नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि परिसरों में छात्रों के अधिकारों और समानता की रक्षा के लिए उनका यह आंदोलन आगे और तेज होगा।