कोलकाता:तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के पूर्व निजी सहायक (PA) सुमित राय की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी और अवैध निर्माण से जुड़े एक पुराने मामले में डायमंड हार्बर पुलिस जिले की कालितला आशुति थाना पुलिस ने उन्हें जेल में ही औपचारिक रूप से 'शोन अरेस्ट' (Shown Arrest) कर लिया है। सुमित राय पहले से ही एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। जिस दिन उनके पुराने मामले की सुनवाई कलकत्ता हाई कोर्ट में निर्धारित थी, उसी दिन पुलिस की इस कार्रवाई से उनकी रिहाई की संभावनाओं को बड़ा झटका लगा है।
कालितला आशुति थाने में दर्ज प्राथमिकी और गंभीर धाराएं
कालितला आशुति थाने में सुमित राय और अन्य के खिलाफ नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन से जुड़ी लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता अभिजीत दास उर्फ बॉबी की तहरीर पर पुलिस ने 16 जून 2026 को केस संख्या 140 दर्ज की थी। प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम जोका-रायपुर क्षेत्र के सखारीपोता मुख्य मार्ग स्थित 'एमएलए लेक' (MLA Lake) क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 329(3), 303(2), 318(4), 316(5), 326(2), 324(4) और 61(2) लगाई गई हैं। इसके अतिरिक्त:
- खान एवं खनिज अधिनियम (Mines and Minerals Act) की धारा 21,
- पश्चिम बंगाल भूमि सुधार अधिनियम (WBLR Act) की धारा 4D,
- पश्चिम बंगाल अंतर्देशीय मत्स्य पालन अधिनियम (Inland Fisheries Act) की धारा 17A,
- सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम (PDPP Act) की धारा 3,
- जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम (Water Pollution Act) की धारा 42 व 43 के तहत कठोर आरोप लगाए गए हैं।
हाई कोर्ट में सुनवाई के बीच पुलिस ने बढ़ाया शिकंजा
सुमित राय पहले से जेल हिरासत में हैं और उनके वकील हाई कोर्ट में उनकी जमानत के लिए प्रयासरत थे। इसी बीच कालितला आशुति पुलिस ने जेल अधिकारियों को वारंट सौंपते हुए उन्हें इस नए मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार दिखा दिया। जांच अधिकारियों का कहना है कि राजनीतिक रसूख का दुरुपयोग कर बेरोजगार युवाओं से नौकरी के नाम पर धन उगाही और सरकारी व प्राकृतिक जलाशयों को अवैध रूप से पाटने के सिंडिकेट में उनकी भूमिका की गहन जांच जरूरी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सुमित राय को अलीपुर जिला अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने की अर्जी दी जाएगी, ताकि पूरे नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन के रिकॉर्ड को खंगाला जा सके।