पुरी. ओडिशा के पुरी स्थित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर में मंगलवार को आस्था का विशेष दृश्य देखने को मिला। पार्श्व परिवर्तन बड़ एकादशी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। सुबह से ही मंदिर परिसर और सिंहद्वार के आसपास भक्तों की आवाजाही बनी रही। स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आए तीर्थयात्री भी विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने के लिए पहुंचे। मंदिर प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए इंतजाम किए ताकि दर्शन सुचारू रहें।
भजन-कीर्तन और पूजा का माहौल
मंदिर परिसर में श्रद्धालु भजन और मंत्रोच्चार करते नजर आए। कई भक्तों ने प्रसिद्ध सिंहद्वार के पास नतमस्तक होकर भगवान का आशीर्वाद लिया। भजन-कीर्तन की गूंज पूरे परिसर में फैली रही और पूजा-अर्चना का माहौल बना रहा। विशेष धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए भक्तों ने सुबह से ही कतारें लगाईं। मंदिर के अंदर और बाहर दोनों जगह आस्था का प्रवाह साफ दिख रहा था। प्रशासन की व्यवस्था से दर्शन और पूजा के दौरान कोई बड़ी अव्यवस्था नहीं हुई।
पार्श्व परिवर्तन एकादशी का महत्व
पार्श्व परिवर्तन एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी, वामन एकादशी, पद्म एकादशी और जलझुलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं में इस दिन का विशेष महत्व है। इसे भगवान विष्णु के क्षीरसागर में योग निद्रा के दौरान करवट बदलने से जोड़ा जाता है। इसी वजह से इसे पार्श्व परिवर्तन एकादशी कहा जाता है। इस अवसर पर भक्त व्रत रखते हैं और भगवान के दर्शन कर पुण्य कमाने का प्रयास करते हैं।
जगन्नाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर 12वीं शताब्दी का प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। यह भगवान जगन्नाथ के साथ उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित है। मंदिर को हिंदू धर्म के प्रमुख चार धाम तीर्थस्थलों में शामिल किया जाता है। कलिंग वास्तुकला की विशिष्ट शैली के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। एकादशी जैसे विशेष अवसरों पर यहां धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल और भी खास हो जाता है। चार धाम यात्रा का यह महत्वपूर्ण केंद्र है।
प्रशासन की व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन
मंदिर प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए। दर्शन और धार्मिक गतिविधियों के दौरान लोगों की आवाजाही सुचारू बनी रहे इसके लिए सुरक्षा और सुविधाओं का ध्यान रखा गया। सिंहद्वार और परिसर के आसपास भीड़ नियंत्रण के उपाय किए गए। भक्तों को कोई असुविधा न हो इसके लिए व्यवस्थाएं पहले से की गई थीं। इस तरह के विशेष अवसरों पर मंदिर प्रशासन की तैयारियां आस्था और सुरक्षा दोनों को संतुलित रखती हैं।