नई दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सुबह ही अपने दिवाली के कार्यक्रम की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा कर दी। उन्होंने बताया कि दीपावली की पूर्व संध्या पर वे दार्जिलिंग के बागडोगरा एयरफील्ड और सिलीगुड़ी के सुकना में तैनात भारतीय सेना के जवानों से मुलाकात करेंगे। अगले दिन यानी 8 नवंबर को दीपावली के अवसर पर वे सिक्किम स्थित शेरथांग युद्ध स्मारक पहुंचेंगे। वहां वे देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे और क्षेत्र में तैनात सैनिकों से संवाद भी करेंगे। रक्षा मंत्री का यह दौरा सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों के मनोबल को बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
बागडोगरा से शेरथांग तक की यात्रा योजना
राजनाथ सिंह पहले बागडोगरा एयरफील्ड पहुंचकर वहां मौजूद जवानों से बातचीत करेंगे। इसके बाद सुकना स्थित सैन्य चौकियों में तैनात सैनिकों से मुलाकात का कार्यक्रम रखा गया है। 8 नवंबर को वे सीधे सिक्किम के शेरथांग युद्ध स्मारक की ओर रवाना होंगे। शेरथांग गंगटोक जिले में नाथूला दर्रे के पास स्थित है और भारत चीन सीमा के निकट होने के कारण रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस पूरे दौरे को सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच अंजाम दिया जाएगा क्योंकि यह क्षेत्र संवेदनशील सीमा से जुड़ा हुआ है। रक्षा मंत्री के इस प्रयास से सीमा पर डटे जवानों को बड़ा नैतिक बल मिलने की उम्मीद है।
शेरथांग युद्ध स्मारक का ऐतिहासिक महत्व
शेरथांग नाथूला दर्रे के पास बसा एक छोटा कस्बा है जिसे भारत और चीन के बीच व्यापार के लिए आबकारी सीमा शुल्क और जांच केंद्र के रूप में चुना गया है। यहां भारत तिब्बत सीमा पुलिस यानी ITBP की एक चौकी स्थित है जो भारत चीन सीमा कार्मिक बैठक बिंदुओं में से एक है। इसी स्थान पर 1967 में नाथूला और चो ला की झड़पों के दौरान शहीद हुए भारतीय जवानों की स्मृति में युद्ध स्मारक बनाया गया है। रक्षा मंत्री यहां पहुंचकर उन वीरों को श्रद्धांजलि देंगे जिन्होंने देश की सीमा की रक्षा में अपना जीवन न्योछावर कर दिया। यह स्मारक भारतीय सेना की वीरता और बलिदान का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।
1967 की नाथूला झड़प की गाथा
13 अगस्त 1967 को चीनी सैनिकों ने सिक्किम की ओर नाथूला में खाइयां खोदना शुरू कर दिया था। इनमें से कुछ खाइयां स्पष्ट रूप से भारतीय सीमा के अंदर थीं। भारतीय सैनिकों ने स्थानीय चीनी कमांडर का ध्यान इस ओर दिलाया और उन्हें वहां से हटने को कहा। शुरू में चीनी सैनिकों ने खाइयां तो भर दीं लेकिन बाद में और लाउडस्पीकर लगाकर वहां से चले गए। इसके बाद भारतीय पक्ष ने सीमा को स्पष्ट करने के लिए नाथूला की पहाड़ियों पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने का निर्णय लिया। इसी दौरान तीन दिन तक चली खूनी झड़प में भारतीय जवानों ने चीनी मोर्चों को नष्ट कर दिया और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA के सैनिकों को पीछे खदेड़ दिया।
भारतीय जवानों की अदम्य वीरता का प्रतीक
1967 की नाथूला और चो ला झड़प भारतीय सेना के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज है। उस समय भारतीय जवानों ने न केवल चीनी घुसपैठ को विफल किया बल्कि उनकी कई चौकियों और मोर्चों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। शेरथांग के आसपास हुई इन झड़पों में भारतीय सैनिकों ने असाधारण साहस और रणनीतिक कुशलता का परिचय दिया। आज भी यह स्थान भारतीय वीरता की मिसाल के रूप में जाना जाता है। रक्षा मंत्री का इसी ऐतिहासिक स्थल पर दिवाली मनाना जवानों के बीच गौरव और प्रेरणा का भाव जगाने वाला है। यह यात्रा सीमा की रक्षा में डटे सैनिकों के प्रति राष्ट्र के सम्मान को भी दर्शाती है।
जवानों से संवाद और श्रद्धांजलि का कार्यक्रम
8 नवंबर को शेरथांग पहुंचकर राजनाथ सिंह सबसे पहले युद्ध स्मारक पर पुष्प चढ़ाकर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद वे वहां तैनात सैनिकों से सीधे संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं तथा जरूरतों को जानेंगे। दीपावली के पावन अवसर पर जवानों के बीच रहकर त्योहार मनाना रक्षा मंत्री की प्राथमिकता रहा है। इस दौरान वे जवानों का मनोबल बढ़ाने वाले संदेश भी देंगे। सीमा पर कठिन परिस्थितियों में तैनात सैनिकों के लिए रक्षा मंत्री की यह उपस्थिति बड़े उत्साह का विषय है। पूरा कार्यक्रम सैन्य अनुशासन और सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ संपन्न किया जाएगा।