फीफा वर्ल्ड कप 2026 (FIFA World Cup 2026) के सह-मेजबान मेक्सिको ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए वो कर दिखाया है, जिसका उसके फैंस को पिछले चार दशकों से इंतजार था। मेक्सिको सिटी स्टेडियम में खेले गए राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में मेक्सिको ने मजबूत इक्वाडोर को 2-0 से शिकस्त देकर अंतिम-16 का टिकट कटा लिया है।
साल 1986 में बुल्गारिया को हराने के बाद, मेक्सिको ने वर्ल्ड कप के नॉकआउट चरण में कभी कोई मैच नहीं जीता था। 1994 से 2018 तक लगातार सात बार यह टीम प्री-क्वार्टर फाइनल से बाहर हुई थी, लेकिन इस बार अपने घरेलू मैदान पर 'एल त्रि' (मेक्सिको टीम) ने इस अभिशाप को तोड़ दिया।
9 मिनट में हुआ खेल, क्विनोनेस और हिमेनेज़ चमके
मैच की शुरुआत से पहले मेक्सिको के प्रशंसकों ने इक्वाडोर की टीम को मानसिक रूप से थका दिया था। रात भर इक्वाडोर के होटल के बाहर हॉर्न बजाए गए और पटाखे फोड़े गए ताकि वे सो न सकें। मैदान पर उतरते ही वही आक्रामकता मेक्सिको के खेल में दिखी।
पहला गोल (22वां मिनट): रॉबर्टो अल्वाराडो के पास पर जूलियन क्विनोनेस (Julian Quinones) ने बॉक्स के कोने से एक बुलेट शॉट मारकर गोल दागा और मेक्सिको को 1-0 से आगे कर दिया।
दूसरा गोल (31वां मिनट): ठीक 9 मिनट बाद, क्विनोनेस के शानदार असिस्ट पर राउल हिमेनेज़ (Raul Jimenez) ने एक और बेहतरीन गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया।
हिंसा और नस्लवाद को हराकर 'नायक' बना कोलंबियाई लड़का
इस ऐतिहासिक जीत के सबसे बड़े हीरो जूलियन क्विनोनेस रहे, जिन्होंने एक गोल किया और दूसरा कराया। क्विनोनेस की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। उनका जन्म दक्षिण कोलंबिया के एक युद्धग्रस्त इलाके में हुआ था, जहां उन्होंने बचपन में बारूद की आवाजें सुनी थीं। 'फुटबॉल पीस' प्रोजेक्ट की मदद से वे वहां से भागे।
दो साल पहले मेक्सिको की धरती पर ही उन्हें फुटबॉल खेलते हुए भयानक नस्लीय टिप्पणी (Racism) का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद वे सऊदी अरब के क्लब अल कादसिया चले गए, जहां उन्होंने इस सीजन में 33 गोल करके क्रिस्टियानो रोनाल्डो तक को पीछे छोड़ दिया। आज उसी मेक्सिको के लिए क्विनोनेस सबसे बड़े मैच विनर बनकर उभरे हैं।
जर्मनी को हराने वाली इक्वाडोर 10 खिलाड़ियों पर सिमटी
ग्रुप स्टेज में जर्मनी जैसी दिग्गज टीम को हराकर नॉकआउट में पहुंची इक्वाडोर की टीम मेक्सिको के अभेद्य डिफेंस को नहीं भेद सकी। दूसरे हाफ में मोइसेस कैसिडो और जॉन येबोआ ने कुछ अच्छे प्रयास किए, लेकिन मेक्सिको के गोलकीपर राउल रेंगल दीवार बनकर खड़े रहे।
मैच के इंजरी टाइम (94वें मिनट) में इक्वाडोर के स्टार डिफेंडर पिएरो हिनकैपी को रेफरी के खिलाफ कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में सीधे रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर कर दिया गया। इसके साथ ही इक्वाडोर का सफर यहीं समाप्त हो गया।
Round of 16: इन मुकाबलों पर रहेंगी दुनिया की नजर
राउंड ऑफ 32 के रोमांच के बाद अंतिम-16 (Round of 16) के कई महामुकाबलों की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है:
मेक्सिको vs इंग्लैंड / डीआर कांगो (विजेता): मेक्सिको का अगला मुकाबला इस मैच के विनर से होगा।
ब्राजील vs नॉर्वे: विनिसियस जूनियर बनाम एर्लिंग हालैंड की महाजंग।
फ्रांस vs पराग्वे: जर्मनी को बाहर का रास्ता दिखाने वाली पराग्वे के सामने होंगे किलियन एमबापे।
कनाडा vs मोरक्को: उत्तरी अमेरिका और अफ्रीकी ताकत के बीच भिड़ंत।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. मेक्सिको ने इससे पहले आखिरी बार वर्ल्ड कप नॉकआउट मैच कब जीता था?
उत्तर: मेक्सिको ने इससे पहले आखिरी बार 40 साल पहले, यानी 1986 के वर्ल्ड कप में बुल्गारिया को हराकर नॉकआउट मैच जीता था।
Q2. इक्वाडोर के खिलाफ मैच में मेक्सिको की जीत के हीरो कौन रहे?
उत्तर: मैच के असली हीरो जूलियन क्विनोनेस रहे, जिन्होंने 22वें मिनट में पहला गोल दागा और 31वें मिनट में राउल हिमेनेज़ के दूसरे गोल के लिए शानदार असिस्ट किया।
Q3. मैच के आखिरी पलों में इक्वाडोर को क्या बड़ा झटका लगा?
उत्तर: मैच के 94वें मिनट (इंजरी टाइम) में इक्वाडोर के स्टार डिफेंडर पिएरो हिनकैपी को रेफरी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए सीधे रेड कार्ड दिखाकर बाहर कर दिया गया।
Q4. राउंड ऑफ 16 में मेक्सिको का सामना किससे हो सकता है?
उत्तर: राउंड ऑफ 16 में मेक्सिको का मुकाबला इंग्लैंड और डीआर कांगो के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगा।