पेट्रोल पंपों पर अब E20 फ्यूल की उपलब्धता आम हो गई है। प्रदूषण घटाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह सरकार का एक बड़ा कदम है, लेकिन वाहन मालिकों के बीच अब भी इसे लेकर संशय बना हुआ है। क्या 20% इथेनॉल वाला यह पेट्रोल आपकी कार के इंजन को अंदर से खोखला कर रहा है? या फिर माइलेज में गिरावट की खबरें सिर्फ एक अफवाह हैं? IND 24 की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए सच्चाई।
इथेनॉल का गणित: क्या वाकई घटता है माइलेज?
विशेषज्ञों के अनुसार, इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता (Energy Density) शुद्ध पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है। इस कारण, सैद्धांतिक रूप से गाड़ी के माइलेज में 2 से 4 फीसदी तक का मामूली अंतर आ सकता है। हालांकि, आधुनिक तकनीक वाली गाड़ियों में 'इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट' (ECU) इस अंतर को खुद ही एडजस्ट कर लेती है, जिससे सामान्य ड्राइविंग के दौरान चालक को कोई बड़ा फर्क महसूस नहीं होता।
इंजन की सेहत: नुकसान या सफाई?
E20 पेट्रोल को लेकर सबसे बड़ा डर 'इंजन डैमेज' का है। ऑटोमोबाइल जानकारों का कहना है कि अगर आपकी गाड़ी का इंजन E20 कंपैटिबल (E20 Compliant) है, तो इसे इस्तेमाल करने से कोई खतरा नहीं है। उल्टा, इथेनॉल एक बेहतरीन सॉल्वेंट (Solvent) है, जो इंजन के भीतर जमा कार्बन डिपॉजिट को साफ करने में मदद करता है। समस्या सिर्फ उन पुरानी गाड़ियों में आ सकती है जिनके फ्यूल सिस्टम के रबर पार्ट्स या पाइप इथेनॉल के साथ केमिकल रिएक्शन कर सकते हैं।
कैसे पहचानें अपनी गाड़ी E20 के लिए सुरक्षित है?
अगर आपकी कार 2023 के बाद खरीदी गई है, तो संभावना है कि उसका इंजन E20 फ्यूल को ध्यान में रखकर ही बनाया गया है। आप अपनी कार के फ्यूल कैप के अंदर या मालिक की हैंडबुक (Owner's Manual) में 'E20' का स्टिकर चेक कर सकते हैं। यदि वहां 'E20' लिखा है, तो बिना किसी हिचकिचाहट के इस ईंधन का उपयोग करें।
विशेषज्ञों की सलाह
- पुरानी गाड़ियों का रखें ख्याल: यदि आपकी गाड़ी पुरानी है, तो लंबे समय तक E20 के उपयोग से पहले फ्यूल सिस्टम की जांच किसी अधिकृत सर्विस सेंटर पर जरूर कराएं।
- इंधन की शुद्धता: हमेशा विश्वसनीय और अधिकृत पेट्रोल पंपों से ही ईंधन भरवाएं ताकि इथेनॉल मिश्रण की गुणवत्ता बनी रहे।
- नियमित सर्विस: इथेनॉल की सफाई प्रक्रिया के कारण इंजन में जमा कार्बन निकल सकता है, इसलिए नियमित सर्विसिंग इंजन की लाइफ को सुरक्षित रखती है।