अल्मोड़ा - उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के काफलीखान गांव के रहने वाले युवा नवप्रवर्तक रवि टम्टा ने अपने गांव में रहकर एक ऐसा इलेक्ट्रिक फ्लाइंग वाहन तैयार किया है, जिसने लोगों का ध्यान खींचा है। खास बात यह है कि रवि ने विज्ञान की औपचारिक पढ़ाई नहीं की, बल्कि इंटरनेट और ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी के जरिए तकनीकी ज्ञान हासिल कर इस प्रोजेक्ट को आकार दिया।

अल्मोड़ा में हुआ फ्लाइंग कार का परीक्षण
शुक्रवार को अल्मोड़ा के आर्मी हेलीपैड पर रवि के बनाए फ्लाइंग वाहन का परीक्षण किया गया। परीक्षण के दौरान यह वाहन करीब एक मिनट तक हवा में रहा। ड्रोन तकनीक पर आधारित इस इलेक्ट्रिक वाहन को व्यक्तिगत उड़ान वाहन के प्रोटोटाइप के तौर पर विकसित किया गया है। रवि टम्टा अपनी कंपनी हपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। उनके प्रोटोटाइप को हपिडा स्काईनेक्स नाम दिया गया है।
2015 में देखा था उड़ने वाली कार का सपना
रवि के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2015 में फ्लाइंग कार बनाने का सपना देखा था। इसके बाद उन्होंने इस दिशा में लगातार काम शुरू किया। करीब डेढ़ साल की मेहनत के बाद उन्होंने अपने प्रोटोटाइप को तैयार किया। उनकी योजना अल्मोड़ा से अपने गांव काफलीखान तक करीब 40 किलोमीटर की उड़ान भरने की थी। उनका अनुमान था कि इस दूरी को हवाई मार्ग से लगभग 12 मिनट में पूरा किया जा सकता है। हालांकि, आवश्यक अनुमति नहीं मिलने के कारण यह उड़ान नहीं हो सकी और परीक्षण के लिए हेलीपैड का इस्तेमाल किया गया।
देश-विदेश से जुटाए उपकरण
इस फ्लाइंग वाहन को तैयार करने में देश और विदेश से प्राप्त विभिन्न उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है। इसका डिजाइन ड्रोन तकनीक पर आधारित है और इसे इलेक्ट्रिक पर्सनल एरियल व्हीकल के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया गया है। हालांकि, किसी भी नियमित यात्री या व्यावसायिक इस्तेमाल से पहले ऐसे वाहन के लिए संबंधित विमानन, सुरक्षा और तकनीकी मंजूरियों की जरूरत होगी।
रवि ने कला से की है ग्रेजुएशन
रवि टम्टा की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने विज्ञान विषय से पढ़ाई नहीं की है। उनकी शुरुआती शिक्षा गांव में हुई और उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल से कला संकाय में स्नातक किया। उनके पिता हरीश राम मोटर मैकेनिक हैं। रवि बताते हैं कि तकनीकी क्षेत्र में उनकी ज्यादातर सीख इंटरनेट के माध्यम से हुई। ऑनलाइन सामग्री और प्रयोगों से उन्हें लगातार नए विचार मिले, जिन्हें उन्होंने व्यावहारिक रूप देने की कोशिश की।
पहले भी कई तकनीकी प्रयोग कर चुके हैं
फ्लाइंग वाहन से पहले भी रवि कई उपयोगी उपकरण तैयार कर चुके हैं। उन्होंने वन विभाग के लिए अग्निशमन से जुड़ा उपकरण, दिव्यांगों के लिए विशेष छड़ी और स्टिक मोबाइल चार्जर जैसे नवाचार किए हैं। उन्होंने हैपिडा पाइन पीट मशीन भी विकसित की है, जिसकी आपूर्ति वन विभाग को किए जाने की जानकारी है। इसके अलावा करीब सात वर्ष पहले उन्होंने इलेक्ट्रोलाइट पंप मशीन तैयार की थी, जिसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को कम समय में चार्ज करने में मदद करना था।
गांव से निकली तकनीकी सोच
रवि टम्टा का यह प्रयोग उत्तराखंड के दूरदराज इलाकों में मौजूद प्रतिभा और इंटरनेट के जरिए तकनीकी ज्ञान हासिल करने की संभावनाओं को भी सामने लाता है। उनका फ्लाइंग वाहन अभी प्रोटोटाइप स्तर पर है, लेकिन सफल परीक्षण ने भविष्य में व्यक्तिगत हवाई परिवहन के क्षेत्र में आगे प्रयोग करने की उम्मीद जरूर जगाई है।