नई दिल्ली: अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित राय को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अहम सुनवाई हुई। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि सुमित राय जांच अधिकारियों के सामने घंटों मौजूद रहने के बावजूद पूछे गए सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं।
सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से CID की जांच की प्रगति से जुड़ी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में पेश की गई। केंद्र ने अदालत को बताया कि जांच एजेंसी सुमित राय को हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है।
सुमित के वकील ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, सुमित राय की ओर से पेश वकील गोपालशंकर नारायण ने जांच में सहयोग नहीं करने के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि सुमित रोज सुबह से शाम तक भवानी भवन में जांच अधिकारियों के सामने पेश हो रहे हैं और पूछताछ में सहयोग कर रहे हैं।
जमीन मामले से जुड़ी जांच
सुमित राय के खिलाफ कथित जमीन भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में जांच चल रही है। उनके वकील ने अदालत में दावा किया कि मामला वर्ष 2021 की कथित घटना से जुड़ा है और इस संबंध में जून 2026 में FIR दर्ज की गई। बचाव पक्ष ने FIR को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया।
गिरफ्तारी पर फिलहाल अंतरिम राहत
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार की सुनवाई में सुमित राय को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की मांग पर तत्काल कोई आदेश नहीं दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है। तब तक सुमित राय को मिली अंतरिम सुरक्षा जारी रहेगी।