कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा अंतर्कलह अपने चरम पर है। अभिषेक बनर्जी द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। अभिषेक ने बागी नेताओं को चुनौती दी थी कि यदि वे ममता बनर्जी के पास वापस लौटें, तो वह एक घंटे के भीतर इस्तीफा दे देंगे। इस बयान पर पलटवार करते हुए अब विपक्षी खेमे का नेतृत्व कर रहे रितब्रत बनर्जी ने तीखा हमला बोला है और अभिषेक से सीधे इस्तीफे की मांग कर दी है।
क्या था अभिषेक का 'चैलेंज'?
अभिषेक बनर्जी ने एक जनसभा के दौरान उन नेताओं पर निशाना साधा जो पार्टी छोड़कर अलग गुट में शामिल हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED, CBI) से बचने के लिए भाजपा के साथ 'डील' की है। उन्होंने चुनौती दी कि अगर ये नेता ममता बनर्जी के पास वापस आते हैं, तो वह पद छोड़ देंगे। अभिषेक के इस बयान को पार्टी में अपनी पकड़ मजबूत दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
रितब्रत का तल्ख पलटवार
अभिषेक की इस चुनौती का जवाब देते हुए रितब्रत बनर्जी ने कहा है कि पार्टी में व्याप्त असंतोष का मुख्य कारण ही अभिषेक बनर्जी हैं। रितब्रत ने आरोप लगाया कि पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, वह अब किसी से छिपा नहीं है। रितब्रत गुट के नेताओं का तर्क है कि अभिषेक का 'अहंकारी' रवैया पार्टी को डूबो रहा है, इसलिए उन्हें पद से हट जाना चाहिए।
टीएमसी में बढ़ता बिखराव
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ यह मोर्चा केवल रितब्रत बनर्जी तक सीमित नहीं है। हाल के दिनों में मदन मित्रा जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से असंतोष व्यक्त किया है और अभिषेक की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के भीतर समांतर संगठन उभरने और सांसदों के अलग गुट बनाने से तृणमूल कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे बड़े संगठनात्मक संकट से गुजर रही है।
सियासी भविष्य पर सवाल
जानकारों का मानना है कि अभिषेक और बागी नेताओं के बीच यह खींचतान केवल बयानों तक सीमित नहीं रहने वाली है। जैसे-जैसे मानसून सत्र नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे इस राजनीतिक टकराव का असर संसद से लेकर बंगाल की सड़कों तक देखने को मिल रहा है। अब देखना यह है कि ममता बनर्जी इस बिखराव को कैसे थामती हैं या फिर पार्टी का यह 'अग्निपथ' उसे किस मोड़ पर ले जाता है।