कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कभी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद सबसे प्रभावशाली नेता माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी इन दिनों राजनीतिक और व्यक्तिगत दोनों मोर्चों पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली बड़ी हार के बाद पार्टी के भीतर और बाहर से उनके खिलाफ दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
सांसदों की बगावत से बढ़ा संकट
अभिषेक बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोकसभा में पार्टी की एकजुटता बनाए रखने की है। टीएमसी के 29 सांसदों में से 20 सांसदों ने बगावत करते हुए नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का ऐलान कर दिया है। बागी सांसदों ने संसद में अलग पहचान और बैठने की व्यवस्था की मांग भी की है। इसके जवाब में अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सभी बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करने की याचिका दायर की है।
सुरक्षा पर मंडराया खतरा
राजनीतिक चुनौतियों के साथ-साथ अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। हाल ही में नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर उनके समर्थकों ने एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा, जिसके पास कथित रूप से हथियार होने का दावा किया गया। टीएमसी ने इसे अभिषेक बनर्जी पर हमले की साजिश बताया है। सत्ता परिवर्तन के बाद कई टीएमसी नेताओं को विरोध, नारेबाजी और हमलों का सामना करना पड़ा है।
केंद्रीय एजेंसियों का बढ़ता दबाव
भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी अभिषेक बनर्जी की परेशानियों का कारण बनी हुई है। अभिषेक का दावा है कि उन्हें पिछले सात दिनों में पांच बार समन जारी किया गया। इसके अलावा उनके और ममता बनर्जी के आवास पर भी जांच एजेंसियों की कार्रवाई होने की बात सामने आई है। उनका आरोप है कि कुछ सांसद एजेंसियों के दबाव और राजनीतिक लाभ के चलते पार्टी छोड़ रहे हैं।
अदालत का नोटिस और अंदरूनी विरोध
अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कानूनी मोर्चे पर भी बढ़ती नजर आ रही हैं।ने एक पुराने सड़क जाम मामले में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को अवमानना का नोटिस जारी किया है। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी समेत कई पुराने नेताओं ने भी उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि हाल के वर्षों में अपनाई गई रणनीतियों ने संगठन को कमजोर किया है।
राजनीतिक भविष्य पर नजर
टीएमसी में बढ़ती अंदरूनी कलह, सांसदों की बगावत, केंद्रीय एजेंसियों की जांच और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच अभिषेक बनर्जी के सामने अपनी राजनीतिक पकड़ और नेतृत्व क्षमता साबित करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। आने वाले दिनों में उनके कदम न केवल उनके राजनीतिक भविष्य, बल्कि टीएमसी की दिशा भी तय कर सकते हैं।