कोलकाता : पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए कटीले तार (Fencing) लगाने के काम में तेजी लाई जा रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार के भूमि एवं भूमि सुधार विभाग ने हाल ही में भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में भूमि सर्वेक्षण (Land Survey) का काम शुरू किया है। कैजूरी से आरशिकारी तक करीब 19 किलोमीटर खुली सीमा पर फेंसिंग निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। लेकिन, इस प्रस्तावित फेंसिंग की लोकेशन को लेकर स्थानीय निवासियों ने गंभीर आपत्ति जताई है, जिससे सीमांत इलाकों में तनाव का माहौल है।
क्या है ग्रामीणों की आपत्ति?
आरशिकारी, पद्मबिला, दोहारकांडा, हकीमपुर और ताराली सहित कई सीमावर्ती गांवों के निवासियों का आरोप है कि प्रशासन अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार:"अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक, सीमा के 'जीरो पॉइंट' से 150 गज की दूरी पर फेंसिंग की जानी चाहिए। लेकिन कुछ इलाकों में इस तय दायरे से बहुत अंदर आकर कटीले तार लगाने की योजना बनाई जा रही है।"
स्कूल, मंदिर और कृषि भूमि के 'बाहर' जाने का डर
स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि प्रशासन की मौजूदा योजना के तहत फेंसिंग की गई, तो कई लोगों के रिहायशी मकान, उप-स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, मंदिर, मस्जिद और सैकड़ों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि फेंसिंग (बेड़े) के उस पार यानी व्यावहारिक रूप से बांग्लादेश की सीमा या 'नो मैन्स लैंड' की तरफ चले जाएंगे। इससे स्थानीय लोगों की दैनिक आजीविका और जीवन पूरी तरह से तबाह हो जाएगा।
समाधान न मिलने पर कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख
सूत्रों के मुताबिक, कुछ महीने पहले इस मुद्दे को लेकर ग्रामीणों की ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) के साथ बैठक हुई थी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। प्रशासनिक स्तर पर राहत न मिलने के कारण अब ग्रामीणों का एक बड़ा हिस्सा कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटानी की तैयारी कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन की इस योजना से आम लोगों के आशियाने और जनसुविधाएं प्रभावित होती हैं, तो अदालत का हस्तक्षेप जरूरी हो जाएगा। इसके लिए वकीलों से कानूनी कानूनी राय मशविरा भी शुरू कर दिया गया है।
'सुरक्षा के खिलाफ नहीं, लेकिन मुआवजा और पुनर्वास मिले'
ग्रामीणों ने साफ किया है कि वे देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर फेंसिंग लगाने के खिलाफ बिल्कुल नहीं हैं। वे भी मानते हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सीमा का सुरक्षित होना जरूरी है। लेकिन उनकी मांग है कि:
1. फेंसिंग का निर्माण अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत जीरो पॉइंट से 150 गज की दूरी पर ही हो।
2. यदि किसी की जमीन या मकान इसके दायरे में आता है, तो प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास (Rehabilitation) की व्यवस्था दी जाए।
फिलहाल, ग्रामीणों की मांगों और प्रशासनिक कदमों को लेकर सीमावर्ती इलाकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है और प्रशासन पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।