कोलकाता: बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद दिलीप घोष ने शुक्रवार (28 अगस्त 2026) को राज्य से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने 9 कैमाक स्ट्रीट स्थित अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर KMC और पुलिस की कार्रवाई, जादवपुर विश्वविद्यालय में 'वंदे मातरम' कार्यक्रम, नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ और मालदा मेडिकल कॉलेज में नवजातों की मौत के मुद्दे पर अपनी राय रखी।
9 कैमाक स्ट्रीट विवाद पर बोले- 'कानून से ऊपर कोई नहीं'
अभिषेक बनर्जी के कार्यालय की छत से कथित रूप से अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक होर्डिंग हटाने पहुंची KMC और पुलिस टीम के साथ हुई झड़प को लेकर दिलीप घोष ने टीएमसी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि कोई होर्डिंग नियमों के खिलाफ लगाया गया है, तो उसे हटाना नगर निगम और प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक कानून सभी के लिए समान है और किसी भी व्यक्ति को प्रशासनिक कार्रवाई से ऊपर नहीं माना जा सकता। दिलीप घोष ने टीएमसी के उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें पुलिस पर राजनीतिक पक्षपात के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि अब पुलिस को निष्पक्ष तरीके से कानून लागू करने की स्वतंत्रता है।
जादवपुर विश्वविद्यालय में 'वंदे मातरम' को लेकर राष्ट्रवाद पर जोर
जादवपुर विश्वविद्यालय में रक्षाबंधन के अवसर पर प्रस्तावित 'वंदे मातरम' कार्यक्रम पर भी दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों द्वारा राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन सामाजिक एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है। उन्होंने बंग-भंग आंदोलन के दौरान रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा राखी को एकता के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख किया। घोष ने कहा कि बंगाल का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और विश्वविद्यालयों में भी राष्ट्रीय भावना को स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने वामपंथी विचारधारा से जुड़े संगठनों पर भी निशाना साधते हुए दावा किया कि जादवपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रवादी गतिविधियों का बढ़ना सकारात्मक बदलाव है।
नेपाल बाढ़ पर चिंता, हिमालयी इलाकों में अनियंत्रित निर्माण पर सवाल
नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ और वहां फंसे भारतीय पर्यटकों को लेकर दिलीप घोष ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत सरकार राहत एवं बचाव कार्यों में नेपाल की मदद कर रही है। हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते अनियंत्रित निर्माण पर सवाल उठाते हुए उन्होंने केदारनाथ जैसी पिछली आपदाओं का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, नदियों के प्राकृतिक बहाव वाले क्षेत्रों में अतिक्रमण, अत्यधिक निर्माण और पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ आपदा का खतरा बढ़ा सकती है। उन्होंने मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले पर्यटकों से मौसम और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की।
मालदा में नवजातों की मौत पर प्रशासन से कार्रवाई की मांग
मालदा मेडिकल कॉलेज में नवजात शिशुओं की मौत की खबर पर दिलीप घोष ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने क्षेत्र में कुपोषण और कम उम्र में विवाह जैसी सामाजिक समस्याओं का जिक्र करते हुए प्रशासन से स्थिति की गंभीरता से समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी समस्याओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।
छात्र संगठनों के कार्यक्रमों पर भी साधा निशाना
कोलकाता में छात्र संगठनों के अलग-अलग स्थापना दिवस कार्यक्रमों को लेकर भी दिलीप घोष ने टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि युवा पीढ़ी पुरानी राजनीतिक विचारधाराओं से आगे बढ़कर नए भारत और राष्ट्रवाद की ओर देख रही है। दिलीप घोष के बयानों में 9 कैमाक स्ट्रीट विवाद से लेकर जादवपुर विश्वविद्यालय और नेपाल बाढ़ तक कानून-व्यवस्था, राष्ट्रवाद और प्रशासनिक कार्रवाई जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।