कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मियों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। कोलकाता पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने 'बंगाली पक्ष’' (Bangla Pokkho) संगठन के संस्थापक और प्रमुख चेहरा गार्गा चटर्जी को गिरफ्तार कर लिया है। गार्गा पर चुनाव के दौरान ईवीएम (EVM) को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने और भड़काऊ टिप्पणी करने का आरोप है। इसके अलावा, एक अन्य सूत्र के मुताबिक, पुलिस को उनके ठिकाने से 24 राउंड जिंदा कारतूस भी बरामद हुए हैं।
EVM और चुनाव आयोग पर उठाए थे सवाल
पुलिस और चुनाव आयोग के अनुसार, गार्गा चटर्जी ने सोशल मीडिया पर चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता को चोट पहुँचाने वाले कई पोस्ट किए थे। 23 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के दौरान कुछ केंद्रों पर तकनीकी खराबी के कारण देरी हुई थी। इस पर गार्गा ने फेसबुक पर सवाल उठाया था कि, "रात में सब कुछ चेक करके सील करने के बाद सुबह मशीनें खराब कैसे हो गईं?" उन्होंने मतदाताओं को यह भी सलाह दी थी कि वोट देने के बाद VVPAT पर्ची को ध्यान से देखें। इतना ही नहीं, मतगणना के दिन उन्होंने आयोग पर 'गुप्त योजना' बनाने का भी आरोप लगाया था।
DEO की शिकायत पर हुई गिरफ्तारी
उत्तर कोलकाता के जिला चुनावी अधिकारी (DEO) ने गार्गा की इन गतिविधियों को आदर्श आचार संहिता और साइबर कानूनों का उल्लंघन मानते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर मंगलवार को पुलिस ने उन्हें देशप्रिय पार्क के पास से हिरासत में लिया। पुलिस ने उनके खिलाफ अफवाह फैलाने और चुनाव प्रक्रिया में व्यवधान डालने का मामला दर्ज किया है।
लालबाजार में कटी रात, आज कोर्ट में पेशी
गार्गा चटर्जी को फिलहाल कोलकाता पुलिस मुख्यालय, लालबाजार ले जाया गया है, जहाँ उन्होंने मंगलवार की रात लॉक-अप में बिताई। पुलिस आज (बुधवार) उन्हें अदालत में पेश करेगी। साइबर सेल और पुलिस अधिकारी अदालत से उनकी हिरासत की मांग कर सकते हैं ताकि ईवीएम पर दिए गए बयानों और बरामद कारतूसों के संबंध में विस्तृत पूछताछ की जा सके।इस गिरफ्तारी के बाद बंगाल की राजनीति में 'अभिव्यक्ति की आजादी' और 'कानूनी मर्यादा' को लेकर नई बहस छिड़ गई है
चुनाव आयोग की शिकायत पर कार्रवाई
गार्गा चटर्जी की गिरफ्तारी के पीछे भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission) की औपचारिक शिकायत है। आयोग का आरोप है कि गार्गा ने सोशल मीडिया के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और जानबूझकर ऐसी टिप्पणियां कीं जिससे जनता के मन में चुनावी प्रणाली के प्रति अविश्वास पैदा हो। आयोग के अनुसार, यह कृत्य आदर्श आचार संहिता और साइबर कानूनों का सीधा उल्लंघन है।