कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर पूर्व खाद्य मंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता ज्योतिप्रिय मल्लिक चर्चा के केंद्र में हैं। तृणमूल कांग्रेस के सभी संगठनात्मक पदों से उनके इस्तीफे के बाद विपक्ष ने उनके खिलाफ पुराने विवादों और आरोपों को फिर से सामने लाना शुरू कर दिया है। राशन वितरण घोटाले में गिरफ्तारी, कामदुनी कांड में विवादित भूमिका और विपक्ष के खिलाफ आक्रामक बयानों को लेकर ज्योतिप्रिय मल्लिक का राजनीतिक सफर लंबे समय से विवादों से घिरा रहा है।
राशन घोटाले में गिरफ्तारी के बाद बढ़ीं मुश्किलें
ज्योतिप्रिय मल्लिक को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के बहुचर्चित राशन वितरण घोटाले में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि खाद्य विभाग की जिम्मेदारी संभालने के दौरान राशन वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं, जिससे सरकारी खाद्यान्न गरीबों तक पहुंचने के बजाय अवैध बाजार में पहुंचा। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद मल्लिक करीब 14 महीने तक जेल में रहे। बाद में उन्हें जमानत मिली और उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों में वापसी की।
कामदुनी कांड में भी उठे थे सवाल
साल 2013 में उत्तर 24 परगना के कामदुनी में एक छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। उस समय राज्य सरकार और प्रशासन की भूमिका को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसी मामले में पीड़िता के परिवार, खासकर उसके भाई ने ज्योतिप्रिय मल्लिक पर मुख्य आरोपी को बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। हालांकि इन आरोपों को लेकर कोई कानूनी निष्कर्ष सामने नहीं आया, लेकिन यह विवाद लंबे समय तक राजनीतिक बहस का विषय बना रहा।
CPM के खिलाफ विवादित बयान
तृणमूल सरकार के शुरुआती वर्षों में ज्योतिप्रिय मल्लिक पार्टी के सबसे मुखर नेताओं में गिने जाते थे। खाद्य मंत्री रहते हुए उन्होंने कई बार CPM के खिलाफ तीखे बयान दिए। राजनीतिक सभाओं में उन्होंने वामपंथी कार्यकर्ताओं के सामाजिक बहिष्कार तक की अपील की थी। विपक्ष ने उन पर राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा देने और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बयानबाजी करने का आरोप लगाया था।
BJP को भी दे चुके हैं चेतावनी
केवल CPM ही नहीं, बल्कि BJP के खिलाफ भी ज्योतिप्रिय मल्लिक कई बार आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं। राज्य में BJP के विस्तार के दौरान उन्होंने कई विवादित टिप्पणियां की थीं, जिन्हें लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग और प्रशासन से शिकायत भी की थी। उनके बयानों को लेकर कई बार राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ।
इस्तीफे के बाद फिर उठे पुराने सवाल
तृणमूल कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद ज्योतिप्रिय मल्लिक एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। CPM और BJP नेताओं ने उनके इस्तीफे को लेकर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह केवल एक संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों का परिणाम है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राशन घोटाले की जांच, पुराने विवादों और हालिया इस्तीफे ने ज्योतिप्रिय मल्लिक के राजनीतिक भविष्य को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है। फिलहाल नजर इस बात पर है कि क्या ज्योतिप्रिय मल्लिक सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका बनाए रख पाएंगे या उनका इस्तीफा बंगाल की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत है।